
Ai Summit Controversy
AI समिट विवाद : सृती ईरानी ने कांग्रेस के विरोध को बताया ‘देश के हित पर हमला’
अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुए विरोध प्रदर्शन से गरमाई राजनीति, राहुल गांधी की भूमिका पर भी उठे सवाल
नई दिल्ली: भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कार्यक्रम में कुछ युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन पर भाजपा की वरिष्ठ नेता सृती ईरानी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस विरोध को भारत की वैश्विक छवि और राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताया।
क्या था AI समिट का उद्देश्य?
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस समिट में विदेशी प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और भारतीय स्टार्टअप्स को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था – भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में निवेश बढ़ाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख उद्योगपति और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ इस मंच पर उपस्थित थे।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
समिट के दौरान कुछ युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अचानक विरोध प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने शर्टलेस होकर नारेबाजी की। उनका दावा था कि वे किसानों और बेरोजगार युवाओं के मुद्दे उठा रहे हैं।
हालांकि, भाजपा नेताओं ने इसे “अनुचित मंच पर किया गया राजनीतिक ड्रामा” बताया।
सृती ईरानी का तीखा बयान
सृती ईरानी ने कहा:
“AI समिट में हमने विदेशी प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को इसलिए आमंत्रित किया ताकि भारतीय व्यवसायों के लिए अवसर बन सकें और नागरिकों के लिए रोजगार सृजित हो। ऐसे मंच पर हमला करना भारत की उद्यमशीलता भावना का अपमान है।”
उन्होंने यह भी कहा कि संसद और सड़कों पर विरोध करने के पर्याप्त अवसर होते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा व्यवहार भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है।
राहुल गांधी पर अप्रत्यक्ष सवाल
भाजपा की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि क्या यह विरोध राहुल गांधी के निर्देश पर किया गया था? ईरानी ने कहा कि यदि ऐसा है तो यह और भी गंभीर मामला है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस आरोप का खंडन किया गया है।
किसानों का मुद्दा – क्या था तर्क?
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे किसानों के हितों के समर्थन में विरोध कर रहे थे। लेकिन सृती ईरानी ने स्पष्ट कहा कि उस दिन समिट में कोई किसान प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। कार्यक्रम में केवल तकनीकी कंपनियों, सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और अकादमिक जगत से जुड़े लोग उपस्थित थे।
राजनीतिक बहस तेज
इस घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा इसे “राष्ट्रीय शर्म” बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग बता रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय निवेश मंचों पर राजनीतिक विरोध उचित है?
निष्कर्ष
AI समिट में हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है। एक ओर सरकार इसे भारत की तकनीकी प्रगति का उत्सव बता रही है, वहीं विपक्ष अपनी आवाज़ उठाने को लोकतांत्रिक अधिकार बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सियासी मंचों पर और गर्मा सकता है।
AI समिट के दौरान हुई यह घटना केवल एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन नहीं रही — बल्कि अब यह राष्ट्रीय छवि, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिष्ठा का बड़ा बहस विषय बन चुकी है।
क्या विरोध लोकतांत्रिक अधिकार था?
क्या ऐसा मंच उचित माध्यम था?
क्या यह भारत के वैश्विक हित के अनुरूप था?
ये सवाल अब राजनीतिक, सामाजिक और मीडिया चर्चा का हिस्सा बन गए हैं, और आने वाले दिनों में अब और भी बयान, बहस और विश्लेषण देखने को मिल सकते हैं।
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