हॉर्मुज संकट 2026: तनाव के बीच भी भारत की तेल आपूर्ति सुरक्षित

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत ने 60 दिनों की तेल आपूर्ति सुरक्षित रखी है और वैकल्पिक मार्गों से संकट को नियंत्रित किया है।
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हॉर्मुज संकट के बीच भारत की तेल आपूर्ति सुरक्षित

हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत की तेल और गैस आपूर्ति बनी सुरक्षित

नई दिल्ली, मार्च 2026: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। खासतौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न संकट ने तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित तरीके से संभालते हुए स्थिति को नियंत्रण में रखा है।

हॉर्मुज संकट और जहाजों की स्थिति

फरवरी 2026 के अंत में संघर्ष तेज होने के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया था, जिससे करीब 200 अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकर फंस गए थे। इनमें कई जहाज भारत के लिए भी ऊर्जा लेकर आ रहे थे।

24 मार्च तक लगभग 20 भारतीय प्रबंधित जहाज, जिनमें कच्चा तेल और एलपीजी लदा हुआ था, देरी का सामना कर रहे थे। इन जहाजों पर करीब 540 भारतीय नाविक मौजूद थे।

स्थिति को देखते हुए भारतीय नौसेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने जहाजों और विमानों को तैनात किया है, ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा सके।

भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3 लाख टन एलपीजी लेकर छह भारतीय झंडे वाले जहाज अभी भी हॉर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं। हालांकि कुछ जहाज सफलतापूर्वक भारत पहुंच चुके हैं।

‘नंदा देवी’ नामक जहाज, जो 46,500 टन एलपीजी लेकर आया था, गुजरात के वाडीनार पोर्ट पर सुरक्षित पहुंच गया। वहीं ‘जग लाडकी’ नामक टैंकर, जिसमें करीब 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल था, 18 मार्च को मुंद्रा पोर्ट पहुंचा।

इसके अलावा ‘शिवालिक’ नामक एक अन्य एलपीजी जहाज भी मुंद्रा पोर्ट पर सफलतापूर्वक डॉक कर चुका है।

तेल आयात की स्थिति

वैश्विक आपूर्ति में कमी को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। भारत ने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाते हुए रूस से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीदना शुरू किया है, जो अब भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन चुका है।

इसके अलावा, भारत को अमेरिका से 30 दिनों की अस्थायी छूट मिली है, जिसके तहत ईरान से सीमित मात्रा में तेल आयात की अनुमति दी गई है। इसी के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज ने लगभग 5 मिलियन बैरल ईरानी कच्चे तेल का सौदा किया है।

वैकल्पिक मार्ग और रणनीति

हॉर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता के कारण भारत ने अपने लगभग 70% तेल आयात को वैकल्पिक समुद्री मार्गों के जरिए मोड़ दिया है। इससे जोखिम कम हुआ है और आपूर्ति श्रृंखला बनी हुई है।

सरकार का कहना है कि इन रणनीतिक फैसलों के चलते देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होगी।

देश में तेल और गैस की उपलब्धता

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए पर्याप्त कच्चा तेल उपलब्ध है। इसके अलावा देश के रणनीतिक भंडार भी मजबूत स्थिति में हैं, जो दो महीने से अधिक की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।

एलपीजी के मामले में भी सरकार ने उत्पादन में 25% तक वृद्धि की है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। हालांकि, व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति में थोड़ी कमी देखी जा सकती है।

जनता के लिए सरकार की अपील

सरकार ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराहट में ईंधन की खरीदारी न करें। देशभर के पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विविध आयात रणनीति, मजबूत भंडारण क्षमता और त्वरित नौसैनिक कार्रवाई के कारण यह संकट बड़े प्रभाव में बदलने से रोका जा सका है।

निष्कर्ष

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को चुनौती दी है, लेकिन भारत ने अपनी दूरदर्शिता और रणनीतिक फैसलों के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखा है। आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना और वैकल्पिक स्रोतों को मजबूत करना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।