ईरान के विदेश मंत्री का अमेरिका पर हमला, भारत के रूसी तेल आयात पर दोहरे मापदंड का आरोप

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रूसी तेल को लेकर अमेरिका पर बरसे ईरान के विदेश मंत्री, भारत के साथ मजबूत रिश्तों का किया जिक्र

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका की नीति पर सवाल उठाए।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का आश्वासन, यूक्रेन युद्ध पर यूरोप की नीति की भी आलोचना

मध्य पूर्व की मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच ईरान के विदेश मंत्री
सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका की नीतियों पर तीखी टिप्पणी की है।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक अमेरिका भारत पर रूसी तेल आयात बंद करने के लिए
दबाव बना रहा था, लेकिन अब वही देश भारत से रूस से तेल खरीदने की अपील कर रहा है।
अराघची ने इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोहरे मानदंड का उदाहरण बताया।

विदेश मंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर देशों को अपने
राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। भारत जैसे बड़े और
तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बेहद जरूरी है।
ऐसे में किसी बाहरी दबाव के आधार पर ऊर्जा नीति तय करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।

भारत के साथ मजबूत संबंधों पर जोर

ईरान ने इस मौके पर भारत के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और
आर्थिक संबंधों को भी रेखांकित किया। अराघची ने कहा कि भारत और ईरान के बीच
ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते बहुत गहरे हैं और दोनों देश
क्षेत्रीय स्थिरता तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए लगातार साथ काम कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बावजूद ईरान भारत के साथ
अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। ऊर्जा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा
और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की
संभावनाएं मौजूद हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग

ईरान ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आश्वासन भी दिया है। विदेश मंत्री ने कहा
कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान
किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के साथ ईरान के संबंध मित्रता और
आपसी विश्वास पर आधारित हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से
एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता
है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति
और बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

ईरान के इस आश्वासन को भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि
भारतीय तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों की बड़ी संख्या इस मार्ग का उपयोग करती है।

यूक्रेन युद्ध पर यूरोप की आलोचना

ईरानी विदेश मंत्री ने इस दौरान यूरोप की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने
कहा कि यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर यूरोपीय देशों की नीति कई बार विरोधाभासी
दिखाई देती है। उनके अनुसार, वैश्विक संकटों का समाधान केवल संवाद और
कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।

अराघची का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे कदम उठाने चाहिए जो
संघर्ष को कम करने में मदद करें, न कि तनाव को और बढ़ाएं। उन्होंने यह भी
कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सभी देशों को संतुलित और
जिम्मेदार नीति अपनानी चाहिए।

ऊर्जा और भू-राजनीति का बदलता समीकरण

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के
कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कई देश
अब अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं।

भारत ने भी हाल के वर्षों में अपनी ऊर्जा रणनीति को अधिक व्यावहारिक और
विविध बनाया है। रूस, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों से तेल आयात करके
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में ईरान का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह
संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत और ईरान के बीच सहयोग
और विश्वास का स्तर मजबूत बना हुआ है।

भविष्य में सहयोग की संभावनाएं

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में भारत और ईरान के बीच
ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सहयोग और बढ़ सकता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति
जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित कई मामलों में समान हैं।

ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार तेजी से बदल रहे हैं,
भारत और ईरान के बीच सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे
क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।