महाराष्ट्र में 1.1 लाख से अधिक शिक्षक 50 वर्ष की आयु के ऊपर, फिर भी नहीं है TET योग्यता
राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में 50 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 1.1 लाख से ज्यादा शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक TET (Teacher Eligibility Test) की योग्यता प्राप्त नहीं की है। यह खुलासा राज्य की शिक्षा प्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है TET और क्यों है जरूरी?
TET यानी Teacher Eligibility Test एक अनिवार्य परीक्षा है, जिसे पास करने के बाद ही किसी शिक्षक को स्थायी रूप से नियुक्ति मिलती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और शिक्षण कौशल रखते हों।
लेकिन रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं जिन्होंने यह परीक्षा पास नहीं की है, विशेषकर वे शिक्षक जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है।
सरकार की क्या है प्रतिक्रिया?
शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी जब TET अनिवार्य नहीं था। बाद में नियम बदले गए, लेकिन पुराने शिक्षकों को छूट दी गई। हालांकि, अब इस विषय पर दोबारा चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सभी शिक्षकों का प्रशिक्षित और प्रमाणित होना बेहद आवश्यक है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर असर?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शिक्षक आधुनिक शिक्षण पद्धति और प्रशिक्षण से नहीं गुजरते हैं, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है। हालांकि कुछ शिक्षकों का अनुभव लंबा और प्रभावशाली रहा है, लेकिन नई शिक्षा नीति और तकनीकी बदलावों के दौर में अद्यतन प्रशिक्षण जरूरी माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
राज्य सरकार इस मुद्दे पर नई नीति ला सकती है। संभावना है कि इन शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम या छूट का प्रावधान किया जाए। फिलहाल शिक्षा जगत में इस विषय पर बहस जारी है।
महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था देश की बड़ी व्यवस्थाओं में से एक है। ऐसे में यह मुद्दा न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि शिक्षकों की योग्यता और प्रशिक्षण को लेकर सख्त कदम उठाना समय की मांग है।
