
पाकिस्तान में गरीबी 11 साल के उच्चतम स्तर पर, आय असमानता 27 साल के रिकॉर्ड पर
आर्थिक संकट से जूझ रहे Pakistan के लिए एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। देश में गरीबी दर बढ़कर 29% तक पहुंच गई है, जो पिछले 11 वर्षों में सबसे अधिक मानी जा रही है। इतना ही नहीं, आय असमानता भी 27 साल के उच्चतम स्तर पर दर्ज की गई है। यह खुलासा एक आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट में हुआ, जिसे योजना मंत्री
Pakistan poverty rate 29%, income inequality PakistanAhsan Iqbal ने सार्वजनिक किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश की लगभग एक तिहाई आबादी अब गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रा अवमूल्यन और आर्थिक अस्थिरता ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। पिछले कुछ वर्षों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे मध्यम वर्ग भी आर्थिक दबाव महसूस कर रहा है।

महंगाई और बेरोजगारी का दोहरा वार
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने लोगों की क्रय शक्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और बिजली की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट को असंतुलित कर दिया है। दूसरी ओर, उद्योगों की धीमी रफ्तार और निवेश में कमी के कारण रोजगार के अवसर भी घटे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। खेती की लागत बढ़ने और उत्पादन में गिरावट के कारण किसानों की आय प्रभावित हुई है। शहरी इलाकों में दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आय में अस्थिरता देखने को मिली है।
आय असमानता क्यों बढ़ी?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमीर और गरीब के बीच की खाई पहले से कहीं ज्यादा चौड़ी हो गई है। जहां एक ओर उच्च आय वर्ग के पास संसाधनों और अवसरों की पहुंच बनी हुई है, वहीं निम्न और मध्यम वर्ग लगातार संघर्ष कर रहा है। आर्थिक नीतियों का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कर प्रणाली में असंतुलन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सीमित पहुंच और शिक्षा-स्वास्थ्य में असमान निवेश भी आय असमानता को बढ़ावा दे रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
योजना मंत्री अहसन इकबाल ने कहा कि सरकार हालात को सुधारने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कर्ज के बोझ और राजनीतिक अस्थिरता ने देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। सरकार का दावा है कि वह सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को मजबूत करने, रोजगार सृजन और आर्थिक सुधारों के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार की नीतियां जमीनी स्तर पर असर नहीं दिखा पा रही हैं। उनका कहना है कि महंगाई पर नियंत्रण और स्थायी रोजगार सृजन के बिना गरीबी दर को कम करना मुश्किल होगा।

भविष्य की चुनौतियां
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते संरचनात्मक सुधार नहीं किए गए, तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है। गरीबी और असमानता का यह स्तर देश की सामाजिक स्थिरता के लिए भी खतरा बन सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता बताई जा रही है।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ संतुलित समझौते और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने की रणनीति भी जरूरी मानी जा रही है। यदि सुधारात्मक कदम प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
फिलहाल, यह आंकड़े पाकिस्तान के लिए चेतावनी की घंटी हैं। आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में सरकार और समाज दोनों को मिलकर समाधान तलाशना होगा, ताकि करोड़ों लोगों को गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकाला जा सके।
