
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव, मुख्य सचिव और गृह सचिव बदले
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, दुश्यंत नारियाला बने नए मुख्य सचिव और संघमित्रा घोष को गृह विभाग की जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला लिया है।
आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जे. पी. मीणा को उनके पद से हटा दिया है।
चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद राज्य के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है।
चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार अब दुश्यंत नारियाला को पश्चिम बंगाल का नया
मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं संघमित्रा घोष को राज्य के गृह एवं हिल अफेयर्स विभाग की जिम्मेदारी
दी गई है। आयोग ने निर्देश दिया है कि इन नियुक्तियों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
चुनाव आयोग ने क्यों लिया यह फैसला?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद पूरे राज्य में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो चुका है।
इस दौरान चुनाव आयोग प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण
कदम उठाता है। इसी प्रक्रिया के तहत कई बार वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला या बदलाव किया जाता है।
चुनाव आयोग का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तंत्र का
तटस्थ होना बेहद जरूरी है। इसलिए आयोग समय-समय पर ऐसे फैसले लेता है जिससे चुनाव के दौरान किसी भी तरह
की पक्षपातपूर्ण स्थिति न बने।
नए मुख्य सचिव दुश्यंत नारियाला कौन हैं?
दुश्यंत नारियाला भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। उन्हें प्रशासनिक अनुभव के आधार पर
पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। मुख्य सचिव राज्य सरकार के सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
होते हैं और पूरे प्रशासनिक ढांचे का संचालन उनके नेतृत्व में होता है।
नारियाला के पास विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों में काम करने का लंबा अनुभव रहा है। चुनाव आयोग को उम्मीद है
कि उनके नेतृत्व में राज्य का प्रशासन चुनाव के दौरान सुचारू रूप से काम करेगा।
संघमित्रा घोष को मिली गृह विभाग की जिम्मेदारी
संघमित्रा घोष को राज्य के गृह और हिल अफेयर्स विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। गृह विभाग चुनाव के दौरान
सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक माना जाता है क्योंकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी इसी
विभाग पर होती है।
चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और संवेदनशील इलाकों की निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण
कार्य इसी विभाग के तहत आते हैं। इसलिए चुनाव आयोग इस विभाग में भी निष्पक्ष और अनुभवी अधिकारी की
नियुक्ति सुनिश्चित करता है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों
का मानना है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक बदलाव आम बात है और इसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष चुनाव
सुनिश्चित करना होता है।
हालांकि विपक्षी दल लंबे समय से चुनाव आयोग से प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव की मांग कर रहे थे।
अब आयोग के इस कदम को उसी दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।
आदेश तुरंत लागू करने का निर्देश
चुनाव आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि इन नियुक्तियों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
साथ ही संबंधित अधिकारियों के कार्यभार ग्रहण करने की रिपोर्ट भी आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर
पर किए गए ये बदलाव चुनाव प्रक्रिया को और अधिक निष्पक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और कौन-कौन से कदम उठाता है और राज्य में
चुनावी माहौल किस तरह आगे बढ़ता है।
