विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव आयोग का सख्त आदेश। सरकारी दफ्तरों से 24 घंटे और सार्वजनिक स्थानों से 48 घंटे में हटेंगे सभी राजनीतिक पोस्टर-बैनर।

चुनाव आयोग का सख्त निर्देश: सरकारी दफ्तरों से हटेंगे सभी राजनीतिक पोस्टर-बैनर, 24 घंटे की समयसीमा तय
राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही चुनावी माहौल पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। इसी बीच चुनाव आयोग ने प्रशासन को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों से चुनावी प्रचार से जुड़े पोस्टर, बैनर और विज्ञापन तुरंत हटाए जाएं। आयोग ने इस काम के लिए 24 घंटे की समयसीमा तय की है।
रविवार को जैसे ही विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ, उसके तुरंत बाद चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता को लागू कर दिया। इसके साथ ही प्रशासन और सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया कि वे किसी भी तरह से सरकारी संसाधनों का उपयोग राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं होने देंगे।
24 घंटे के भीतर हटाने होंगे सरकारी भवनों से पोस्टर
चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, भवनों और परिसरों से चुनावी प्रचार से जुड़े बैनर, पोस्टर और फ्लेक्स 24 घंटे के भीतर हटाने होंगे। आयोग का मानना है कि सरकारी परिसरों में किसी भी राजनीतिक दल या नेता के प्रचार सामग्री का लगे रहना चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सरकारी भवनों की जांच करें और वहां लगे किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार सामग्री को तुरंत हटाएं।
रेल स्टेशन, बस स्टैंड और पुलों से 48 घंटे में हटेंगे विज्ञापन
केवल सरकारी कार्यालय ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर भी लगे राजनीतिक विज्ञापनों को हटाने का आदेश दिया गया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि रेल स्टेशन, बस स्टैंड, हवाई अड्डों, पुलों, सरकारी बसों, इलेक्ट्रिक पोल और टेलीफोन पोल जैसे सार्वजनिक स्थानों से सभी राजनीतिक पोस्टर और बैनर 48 घंटे के भीतर हटाने होंगे।
आयोग के अनुसार इन स्थानों पर लगे राजनीतिक विज्ञापन आम जनता को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए चुनाव के दौरान ऐसे किसी भी प्रचार सामग्री को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए नगर निगम, पंचायत और संबंधित विभागों को जिम्मेदारी दी गई है।
आदर्श आचार संहिता लागू
विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसका मतलब है कि अब सरकार कोई नई योजना या परियोजना की घोषणा नहीं कर सकती। इसके अलावा सरकारी धन का उपयोग किसी भी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जा सकता।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासन को पूरी तरह निष्पक्ष रहना होगा और किसी भी राजनीतिक दल को सरकारी संसाधनों का लाभ नहीं मिलने दिया जाएगा।
सरकारी परियोजनाओं पर नजर रखेगी स्क्रीनिंग कमिटी
आयोग ने यह भी बताया कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान यदि किसी सरकारी परियोजना को लागू करने का प्रस्ताव आता है, तो उसे सीधे मंजूरी नहीं दी जाएगी। इसके लिए एक विशेष स्क्रीनिंग कमिटी बनाई गई है।
यह कमिटी हर प्रस्ताव की जांच करेगी और यह तय करेगी कि वह परियोजना चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित तो नहीं कर रही। यदि कमिटी को लगता है कि परियोजना जरूरी है और उसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है, तभी उसे आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी।
प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देश
चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वे इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। यदि कहीं भी राजनीतिक पोस्टर या बैनर निर्धारित समय के बाद भी लगे पाए जाते हैं, तो संबंधित विभागों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चुनावी माहौल में बढ़ी सक्रियता
विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने और मतदाताओं तक पहुंचने की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि अब उन्हें चुनाव आयोग के नियमों और आदर्श आचार संहिता का पूरी तरह पालन करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग के इस कदम से चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी। साथ ही सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी।
आने वाले दिनों में प्रशासन और चुनाव आयोग की टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सभी निर्देशों का सही तरीके से पालन हो और राज्य में शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष चुनाव संपन्न हो सकें।
