हनुमान जयंती 2026: दमदम हनुमान मंदिर में भारी भीड़, ऋषिकेश त्रिपाठी की सेवा सराही गई

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Hanuman Jayanti Dumdum 2026 के अवसर पर कोलकाता के दमदमस्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।

कोलकाता | 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार)
पावन अवसर हनुमान जयंती के दिन कोलकाता के दमदम स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में आस्था और भक्ति का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया, जो कुछ ही घंटों में विशाल जनसैलाब में बदल गया। हजारों-हजार श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी गहरी आस्था और विश्वास का परिचय दिया।
मंदिर परिसर “जय बजरंगबली” और “संकट मोचन हनुमान” के जयघोष से गूंज उठा। चारों ओर भक्ति का ऐसा वातावरण था, मानो पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया हो। दूर-दराज से आए भक्तों के चेहरों पर श्रद्धा और उत्साह साफ झलक रहा था। कई श्रद्धालु रात से ही मंदिर के बाहर लाइन में खड़े थे, ताकि वे इस पावन दिन सबसे पहले दर्शन कर सकें।
सुबह होते-होते मंदिर के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे—हर वर्ग के लोग इस धार्मिक उत्सव में शामिल होने पहुंचे। घंटों इंतजार के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। सभी के चेहरे पर एक ही भाव था—भक्ति और विश्वास।
इस अवसर पर मंदिर को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। फूलों की मालाएं, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक सजावट ने मंदिर को एक दिव्य स्वरूप प्रदान किया। प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक हर स्थान पर सजावट की गई थी, जो श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही थी।
मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान हनुमान का अभिषेक किया गया। इसके बाद आरती, भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति संगीत की मधुर ध्वनि गूंजती रही।
मंदिर प्रशासन द्वारा इस अवसर पर व्यापक तैयारियां की गई थीं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कर सकें। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अलग से विशेष व्यवस्था की गई थी, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती की गई थी और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। यातायात व्यवस्था को भी नियंत्रित किया गया, जिससे आसपास के इलाकों में जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।
मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण का विशेष आयोजन किया गया था। श्रद्धालुओं को लड्डू, फल और अन्य प्रसाद वितरित किए गए। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी भंडारे का आयोजन किया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
लेकिन इस पूरे आयोजन के बीच जिस एक नाम ने सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान आकर्षित किया, वह था मंदिर के सेवक ऋषिकेश त्रिपाठी।
बताया जा रहा है कि उनका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं था, इसके बावजूद उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटना उचित नहीं समझा। उन्होंने लगातार फोन के माध्यम से मंदिर की व्यवस्था की जानकारी ली और यह सुनिश्चित किया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सूत्रों के अनुसार, त्रिपाठी जी ने दिनभर कई बार फोन करके स्थिति का जायजा लिया और हर छोटी-बड़ी व्यवस्था पर नजर रखी। उनकी इस समर्पित सेवा भावना ने सभी को प्रभावित किया।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने उनकी जमकर प्रशंसा की। एक श्रद्धालु ने कहा,
“आज के समय में जब लोग छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से बचते हैं, तब ऋषिकेश त्रिपाठी जैसे लोग सच्ची सेवा और भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।”
एक अन्य भक्त ने बताया,
“बीमार होने के बावजूद जिस तरह से उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई, वह काबिल-ए-तारीफ है। ऐसे लोग ही समाज को प्रेरणा देते हैं।”
त्रिपाठी जी का यह समर्पण इस बात को दर्शाता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी निभाने में भी दिखाई देती है।
मंदिर के अन्य सेवकों ने भी उनके कार्य की सराहना की और कहा कि उनका यह समर्पण सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया भी इस आयोजन को लेकर बेहद सकारात्मक रही। कई भक्तों ने कहा कि वे हर साल हनुमान जयंती पर इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। उनका मानना है कि इस दिन यहां दर्शन करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और भगवान हनुमान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मंदिर के आसपास का पूरा इलाका भी भक्तिमय हो गया था। दुकानों पर फूल, प्रसाद और पूजा सामग्री की बिक्री बढ़ गई थी। स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह दिन खास साबित हुआ।
हनुमान जयंती का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूत करता है। इस दिन लोग एक साथ मिलकर पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान हनुमान से शक्ति, साहस और सफलता की कामना करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। यह त्योहार सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश देता है।
दमदम हनुमान मंदिर में इस वर्ष मनाई गई हनुमान जयंती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था की शक्ति असीम होती है। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उनका उत्साह इस बात का प्रमाण है कि भगवान हनुमान के प्रति लोगों की श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत और अटूट है।
अंत में कहा जा सकता है कि डम डम हनुमान मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों को भी उजागर करने में सफल रहा।
और इस पूरे आयोजन के बीच ऋषिकेश त्रिपाठी की सेवा भावना एक प्रेरणादायक कहानी बनकर उभरी, जिसने यह दिखा दिया कि सच्ची भक्ति सेवा और समर्पण में ही निहित होती है।
🎤 समापन पंक्ति
“भक्ति के साथ सेवा का संगम—दमदम हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती का भव्य आयोजन, और सेवा की मिसाल बने ऋषिकेश त्रिपाठी।”