मतदाता सूची विवाद पर गरमाई बंगाल की राजनीति, कांग्रेस नेता मौसम नूर ने चुनाव बहिष्कार का दिया सुझा

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Mausam Noor Election Boycott remark has triggered a fresh political controversy in West Bengal after the former Congress MP alleged voter list irregularities in Malda.

कोलकाता, 5 मार्च: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गर्म कर दिया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मौसम नूर ने आरोप लगाया है कि मालदा जिले में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम को “अंडर एडजुडिकेशन” के तहत रखा गया है। उनका दावा है कि इस कारण लाखों लोग अपने मतदान अधिकार को लेकर असमंजस में हैं।

मौसम नूर ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो पार्टी को पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों के बहिष्कार पर भी विचार करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है।

मीडिया से बातचीत के दौरान मौसम नूर ने कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार सबसे बड़ा अधिकार होता है। अगर किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची में होने के बावजूद उसे “अंडर एडजुडिकेशन” दिखाया जाता है, तो यह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मालदा जिले के कई इलाकों में हजारों नहीं बल्कि लाखों मतदाताओं के नाम इस श्रेणी में डाल दिए गए हैं, जिससे लोगों में भ्रम और चिंता की स्थिति बन गई है।

 

उन्होंने कहा कि कई लोग ऐसे हैं जो वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार अचानक उनके नाम के सामने “अंडर एडजुडिकेशन” का उल्लेख किया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर यह प्रक्रिया किस आधार पर की जा रही है। मौसम नूर ने कहा कि अगर इस मुद्दे को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

 

पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि इस विषय को लेकर कांग्रेस पार्टी गंभीर है और वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी। उन्होंने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि वे इस मामले में चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से बातचीत करें ताकि मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे इस विवाद का असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है। राज्य में पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। ऐसे में अगर मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठते हैं तो इसका राजनीतिक माहौल पर सीधा प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

इस बीच स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अपने मताधिकार को लेकर चिंता हो रही है। कई मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने वर्षों से नियमित रूप से मतदान किया है और अब अचानक उनके नाम के सामने “अंडर एडजुडिकेशन” लिखा दिखाई दे रहा है। इससे उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे आगामी चुनाव में मतदान कर पाएंगे या नहीं।

 

हालांकि चुनाव से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया नियमित रूप से की जाती है। उनका कहना है कि यदि किसी मतदाता का नाम किसी कारणवश जांच के दायरे में आता है तो उसे “अंडर एडजुडिकेशन” के रूप में दर्ज किया जा सकता है। ऐसे मामलों में उचित दस्तावेज और प्रक्रिया के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाती है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का मुद्दा अक्सर चुनाव के समय चर्चा में आता है। विभिन्न दल समय-समय पर आरोप लगाते रहे हैं कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हो सकती है। हालांकि चुनाव आयोग हमेशा यह दावा करता है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार की जाती है।

मौसम नूर के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस के कई नेताओं ने भी इस विषय पर चिंता जताई है और कहा है कि अगर किसी भी मतदाता के अधिकारों का हनन हो रहा है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग और प्रशासन इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं। अगर मतदाताओं की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द समाधान निकालना होगा ताकि लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

फिलहाल इस मुद्दे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। सभी दल इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और आने वाले समय में यह विषय और भी महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।