
द्रौपदी मुर्मु पश्चिम बंगाल दौरा पर 6 और 7 मार्च को राज्य में कई कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचीं।
कोलकाता, 6 मार्च। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचीं। उनका यह दौरा 6 और 7 मार्च तक चलेगा, जिसमें वे राज्य के विभिन्न सरकारी, शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी। राष्ट्रपति के इस दौरे को राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से सांस्कृतिक विरासत, आदिवासी समाज और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों को बढ़ावा देने का संदेश दिया जाएगा।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम के अनुसार, 6 मार्च को वे दार्जिलिंग में आयोजित होने वाले “दार्जिलिंग हिल फेस्टिवल” का उद्घाटन करेंगी। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन विशेष रूप से भारत के प्रसिद्ध देशभक्ति गीत “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आदिवासी समुदाय की विरासत को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
दार्जिलिंग के लोक भवन में आयोजित इस समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ एक विशेष प्रदर्शनी “रूट्स एंड रिदम्स” का भी उद्घाटन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में पहाड़ी और आदिवासी समुदाय की कला, संगीत, नृत्य और पारंपरिक जीवनशैली को प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दौरे के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के एक विशेष कार्यक्रम में भी भाग लेंगी। वे यहां से महिला नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण से जुड़े एक विशेष कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन करेंगी। यह कार्यक्रम महिलाओं को नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाने और समाज में उनकी भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
आईआईटी खड़गपुर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के शिक्षाविद, शोधकर्ता और छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। इस अवसर पर राष्ट्रपति महिलाओं की शिक्षा, नवाचार और नेतृत्व के महत्व पर भी अपने विचार रखेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह संदेश देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक होगा।
अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन यानी 7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु दार्जिलिंग में आयोजित होने वाले 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस सम्मेलन का आयोजन इंटरनेशनल संताल काउंसिल द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देश और विदेश से संताल समुदाय के प्रतिनिधि, विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे।
इस सम्मेलन का उद्देश्य संताल समुदाय की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संरक्षित करना तथा उनके सामाजिक और आर्थिक विकास पर चर्चा करना है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में आदिवासी समाज के अधिकार, शिक्षा, संस्कृति और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्वयं भी आदिवासी समुदाय से आती हैं और उन्होंने अपने जीवन में आदिवासी समाज के उत्थान के लिए लगातार कार्य किया है। इसलिए इस सम्मेलन में उनकी उपस्थिति को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके संबोधन से आदिवासी समाज के विकास और सशक्तिकरण को लेकर नई दिशा मिल सकती है।
राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारियां की हैं। दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कार्यक्रम स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह दौरा पश्चिम बंगाल के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और आदिवासी समाज के विकास के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित होगा।
इसके अलावा महिला सशक्तिकरण और शिक्षा जैसे विषयों को लेकर राष्ट्रपति का संदेश समाज में सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने में भी मदद करते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब देश में सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक समावेशन और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हो रही है। ऐसे में उनके संबोधन और कार्यक्रमों से इन मुद्दों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कुल मिलाकर राष्ट्रपति का यह दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरा सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य के लोगों को उम्मीद है कि इस दौरे से पश्चिम बंगाल की समृद्ध संस्कृति और आदिवासी परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
