नहीं रहे बंग राजनीति के रणनीतिकार मुकुल राय, लंबी बीमारी के बाद निधन

Mukul Roy death news: पश्चिम बंगाल की राजनीति के वरिष्ठ नेता मुकुल राय का रविवार देर रात निधन हो गया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति के बेहद प्रभावशाली और रणनीतिकार नेता, जिन्हें एक समय ‘बंग राजनीति का चाणक्य’ कहा जाता था, वरिष्ठ राजनेता मुकुल राय का रविवार देर रात कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से किडनी समेत कई गंभीर शारीरिक बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से राज्य की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।

बताया जा रहा है कि पिछले काफी समय से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी और उन्हें बीच-बीच में अस्पताल में भर्ती कराया जाता था। स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन की खबर मिलते ही उनके आवास के बाहर तृणमूल कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और समर्थकों की भारी भीड़ जुटने लगी। अस्पताल से उनका पार्थिव शरीर घर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

लंबे समय से चल रही थी बीमारी

मुकुल राय काफी समय से किडनी संबंधी समस्याओं सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय राजनीति से काफी दूर हो गए थे। परिवार और चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था।

स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही थी, लेकिन अंततः रविवार देर रात उनकी स्थिति गंभीर हो गई और उनका निधन हो गया।

पश्चिम बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा

मुकुल राय पश्चिम बंगाल की राजनीति के सबसे अनुभवी और रणनीतिक नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें संगठन बनाने और चुनावी रणनीति तैयार करने में महारत हासिल थी। इसी कारण उन्हें “बंग राजनीति का चाणक्य” कहा जाता था।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे और विभिन्न दलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।

तृणमूल कांग्रेस से राजनीतिक उभार

मुकुल राय का राजनीतिक कद तृणमूल कांग्रेस के साथ तेजी से बढ़ा। वे पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते थे। पार्टी के संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

तृणमूल कांग्रेस को राज्य की सत्ता तक पहुंचाने में उनकी रणनीतिक भूमिका को राजनीतिक विश्लेषक आज भी याद करते हैं। लंबे समय तक वे पार्टी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे।

बीजेपी में शामिल होने का फैसला

तृणमूल कांग्रेस से मतभेद के बाद मुकुल राय ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। उनके बीजेपी में शामिल होने को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना गया था।

उन्होंने बीजेपी के संगठन को मजबूत करने और राज्य में पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके आने से बीजेपी को पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक ताकत मिली।

2021 विधानसभा चुनाव और जीत

वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुकुल राय ने कृष्णानगर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधायक बने। यह जीत उनके राजनीतिक प्रभाव का प्रमाण मानी गई।

हालांकि चुनाव के बाद उन्होंने फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। लेकिन उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया, जिसके कारण वे आधिकारिक रूप से बीजेपी विधायक बने रहे।

राजनीतिक विवाद और कानूनी मामला

तृणमूल कांग्रेस में वापसी के बाद उनकी सदस्यता और विधायक पद को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) का चेयरमैन भी बनाया गया था।

उनके विधायक पद को रद्द करने का मामला अदालत तक पहुंच गया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला दिया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इस मामले को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रही।

राजनीति से दूरी और निजी जीवन

स्वास्थ्य कारणों से मुकुल राय धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे। सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति कम हो गई थी और वे लंबे समय से उपचाराधीन थे।

राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहने के बावजूद उनके निजी जीवन में सादगी और संगठनात्मक कार्यों के प्रति समर्पण देखा जाता था। वे पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने वाले नेता के रूप में पहचाने जाते थे।

राजनीतिक जगत में शोक

मुकुल राय के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। राज्य की राजनीति में उनके योगदान को याद करते हुए नेताओं ने उन्हें कुशल रणनीतिकार और अनुभवी राजनेता बताया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।

समर्थकों में शोक की लहर

उनके निधन की खबर फैलते ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास के बाहर बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

एक युग का अंत

मुकुल राय का राजनीतिक जीवन संघर्ष, रणनीति और संगठनात्मक कौशल का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया और अपनी अलग पहचान बनाई।

उनके निधन के साथ राज्य की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसने पर्दे के पीछे रहकर राजनीतिक समीकरण बदलने की क्षमता दिखाई।