मोदी सरकार लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। संसद में पेश होने वाले इस बड़े बिल पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है।

लोकसभा सीटों का पुनर्विन्यास और महिला आरक्षण में बदलाव: 2029 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक कदम
नई दिल्ली: केंद्र सरकार जल्द ही संसद में लोकसभा सीटों के पुनर्विन्यास और महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़ा अहम बिल पेश करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू करना है। इस प्रस्तावित कानून का औपचारिक नाम ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ है।
लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850 होने का प्रस्ताव
इस बिल के साथ 131वां संविधान संशोधन विधेयक भी संसद में पेश किया जाएगा। बिल के मसौदे के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती है। यह कदम देश की बढ़ती जनसंख्या और बेहतर प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में न्यूनतम 50% की बढ़ोतरी की योजना है। उदाहरण के तौर पर, पश्चिम बंगाल की सीटें 42 से बढ़कर लगभग 63 तक हो सकती हैं।
महिला आरक्षण लागू करने की नई रणनीति
सरकार इस संशोधन के जरिए महिला आरक्षण को जल्दी लागू करना चाहती है। पहले 2023 में पारित कानून के अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और उसके बाद परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी था।
उस कानून में प्रावधान था कि परिसीमन के बाद कुल सीटों में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। लेकिन अब सरकार इस प्रक्रिया को तेज करते हुए जनगणना रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही सीटों की संख्या बढ़ाने और आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन का प्रस्ताव
इस नए विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 82 में संशोधन का प्रस्ताव शामिल है। वर्तमान नियम के अनुसार, जनगणना के बाद ही परिसीमन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। लेकिन सरकार इस नियम में बदलाव कर पहले ही सीटों का पुनर्विन्यास करना चाहती है।
इसका उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करना बताया जा रहा है।
विशेष संसद सत्र: 16 से 18 अप्रैल
इस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने के लिए सरकार ने संसद के बजट सत्र की अवधि बढ़ाकर 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया है। इन तीन दिनों में सरकार इस विधेयक को दोनों सदनों से पारित कराने की कोशिश करेगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
सरकार के इस कदम पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार 2029 के चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए जल्दबाजी में यह संशोधन ला रही है।
विपक्ष का कहना है कि अगर 2023 के कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाती, तो महिला आरक्षण 2034 के लोकसभा चुनाव तक ही लागू हो पाता। लेकिन अब सरकार इसे पहले लागू करने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है।
दो-तिहाई बहुमत की चुनौती
संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। वर्तमान स्थिति में सरकार के पास यह बहुमत नहीं है, जिससे बिल पास कराना आसान नहीं होगा।
इसी को देखते हुए विपक्षी दल इस बिल को रोकने की रणनीति बना रहे हैं। 15 अप्रैल को दिल्ली में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक भी प्रस्तावित है।
राजनीतिक असर और भविष्य
अगर यह बिल पास हो जाता है, तो भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और राज्यों के प्रतिनिधित्व में भी बदलाव आएगा।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस पर तीखी चर्चा देखने को मिल सकती है।
