Harinam Sankirtan के पावन अवसर पर कोलकाता के राजारहाट-न्यूटाउन क्षेत्र में 43वां भव्य आयोजन किया गया
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने की दिशा में राजारहाट-न्यूटाउन क्षेत्र के हातियारा, रायपाड़ा और पंचानंतला में इस वर्ष भी भव्य हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया, जो पिछले 43 वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है और स्थानीय लोगों के लिए आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। बंगाली वर्ष के अंतिम दिन आयोजित इस पावन कार्यक्रम में महाप्रभु श्रीकृष्ण और श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रति अटूट भक्ति का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला, जहां “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे” के पवित्र महामंत्र की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

आयोजन स्थल को रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक फूलों की सजावट से भव्य रूप प्रदान किया गया था, जिससे दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। प्रवेश द्वार को विशेष रूप से सुंदर लाइटों और पुष्प सज्जा से सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम में स्थापित राधा-कृष्ण की मनमोहक प्रतिमा को फूलों की मालाओं और पारंपरिक अलंकरण से सुसज्जित किया गया, जहां भक्तों ने पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। संकीर्तन के दौरान मृदंग, करताल और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया और अनेक श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर नृत्य करते हुए दिखाई दिए। इस पावन अवसर पर लगभग 5000 श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की भव्य व्यवस्था की गई, जिसे अत्यंत अनुशासित और शांतिपूर्ण ढंग से वितरित किया गया।

श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रसाद ग्रहण करते नजर आए, जो सामाजिक समरसता और सामुदायिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। आयोजन की सफलता में स्थानीय निवासियों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने पूरे समर्पण और निस्वार्थ भाव से कार्यक्रम को संपन्न कराने में योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान विशेष पूजा, आरती और प्रार्थना का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने आने वाले नए बंगाली वर्ष के लिए सुख, शांति, समृद्धि और भगवान के आशीर्वाद की कामना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जहां सभी वर्गों और समुदायों के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ सम्मिलित होकर भाईचारे और एकता का संदेश देते हैं। हरिनाम संकीर्तन का यह 43वां वर्ष इस बात का प्रमाण है कि परंपराएं समय के साथ और अधिक सशक्त होती जाती हैं तथा समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करती हैं। कार्यक्रम में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे और भी विशेष बना दिया। रात्रि के समय जगमगाती रोशनी, फूलों से सजे मंडप और भक्ति संगीत की मधुर ध्वनि ने एक दिव्य और अलौकिक वातावरण का निर्माण किया, जिसने सभी उपस्थित लोगों के मन को शांति और आध्यात्मिक संतोष से भर दिया। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाना तथा नए वर्ष की शुरुआत भगवान के नाम-स्मरण के साथ करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 43 वर्षों से क्षेत्र के लोगों का सहयोग और उत्साह इस आयोजन की सबसे बड़ी शक्ति रहा है।प्रशासन की ओर से भी आवश्यक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। हरिनाम संकीर्तन का यह भव्य आयोजन राजारहाट-न्यूटाउन क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़
है तथा यह संदेश देता है कि भक्ति और श्रद्धा के माध्यम से समाज में शांति और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है। नए बंगाली वर्ष के आगमन से पूर्व आयोजित यह कार्यक्रम सभी के लिए आशा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बना, जिसने लोगों के हृदय में भगवान के प्रति विश्वास और आस्था को और अधिक मजबूत किया। इस प्रकार, हातियारा, रायपाड़ा और पंचानंतला में आयोजित 43वां हरिनाम संकीर्तन न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का भव्य उत्सव बनकर उभरा, जिसे आने वाले वर्षों में भी इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाने की उम्मीद है।

