
पूर्व बर्द्धमान के आलू किसान इस समय भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
आलू की गिरती कीमतों से पूर्व बर्द्धमान के किसान संकट में
Potato Crisis in Purba Bardhaman: Farmers Forced to Sell Crops Below Cost Price
पूर्व बर्द्धमान: पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्द्धमान जिले में इस समय आलू किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। लगभग 69,000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती करने वाले किसान अपनी फसल का उचित मूल्य न मिलने के कारण भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
एक बीघा में 25-30 हजार रुपये तक खर्च
किसानों के अनुसार, एक बीघा (लगभग 33 सोटक) जमीन पर आलू की खेती करने में औसतन 25,000 से 30,000 रुपये तक का खर्च आता है। इसमें बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च शामिल हैं। कई किसानों ने बैंक से कर्ज लेकर खेती की है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
उपज ज्यादा, लेकिन दाम बेहद कम
इस वर्ष मौसम अनुकूल रहा और सिंचाई व्यवस्था भी बेहतर रही, जिससे आलू की पैदावार में वृद्धि हुई। एक बीघा में औसतन 100 से 120 बोरा आलू का उत्पादन हुआ है। लेकिन जब बाजार में कीमत गिरकर 200 रुपये प्रति बोरा रह गई, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यदि एक बीघा में 100 बोरा आलू भी बिकता है और कीमत 200 रुपये प्रति बोरा मिलती है, तो कुल आय 20,000 रुपये ही होती है। यह राशि खेती में लगे खर्च से 5,000 से 10,000 रुपये कम है। ऐसे में किसानों को सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है।
बैंक लोन और बढ़ती चिंता
कई किसानों ने खेती के लिए बैंक से ऋण लिया है। अब जब फसल का दाम लागत से भी कम मिल रहा है, तो उन्हें बैंक का मूलधन और ब्याज चुकाने की चिंता सता रही है। किसान परिवारों में तनाव और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।
एक किसान ने बताया, “हमने सोचा था इस बार अच्छी पैदावार से कुछ बचत होगी, लेकिन बाजार में कीमत इतनी गिर गई कि लागत भी नहीं निकल पा रही है।”
सुफल बंगला योजना पर टिकी उम्मीद
राज्य सरकार की ‘सुफल बंगला’ योजना के तहत किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आलू खरीदने की बात कही गई थी। लेकिन अभी तक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं होगी, तब तक उन्हें उचित मूल्य मिलना मुश्किल है।
कृषक सूत्रों के अनुसार, यदि सरकार शीघ्र हस्तक्षेप नहीं करती, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है। कई किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द सरकारी खरीद केंद्र खोले जाएं और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राहत दी जाए।
भविष्य को लेकर गहरी चिंता
पूर्व बर्द्धमान के हजारों किसान इस समय असमंजस और चिंता में दिन बिता रहे हैं। बढ़ती लागत, गिरती कीमतें और कर्ज का बोझ उन्हें मानसिक रूप से भी प्रभावित कर रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में किसान आलू की खेती से दूरी भी बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर बाजार को स्थिर करना चाहिए और किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी देनी चाहिए।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन किसानों की इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी निकालते हैं। फिलहाल, पूर्व बर्द्धमान के आलू किसान उम्मीद और चिंता के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
