पश्चिम एशिया संकट पर दिल्ली में हाई लेवल बैठक, पीएम मोदी ने बुलाई CCS की आपात बैठक

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मध्य पूर्व संकट पर दिल्ली में हाई लेवल बैठक

मध्य पूर्व युद्ध संकट पर दिल्ली में हाई लेवल बैठक

प्रधानमंत्री आवास पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की अहम चर्चा

Indian citizens’ safety, flight disruptions, and the Hormuz Strait crisis discussed in the central government’s strategic meeting.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध संकट के बीच राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास पर देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़ी सर्वोच्च संस्था सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में क्षेत्रीय हालात और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में विशेष रूप से पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और संभावित आपातकालीन योजना पर मंथन किया गया।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

प्रधानमंत्री के अलावा इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, शक्तिकांत दास, रक्षा स्टाफ प्रमुख जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिस्री उपस्थित रहे।

बैठक में खुफिया और सामरिक रिपोर्ट के आधार पर वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

पश्चिम एशिया में फंसे भारतीय

सैन्य अभियानों और हवाई क्षेत्र में बाधा के कारण दुबई, दोहा और क्षेत्र के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर सैकड़ों भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने भारत सरकार से सुरक्षित निकासी और मदद की अपील की है।

विदेश मंत्रालय और संबंधित भारतीय दूतावास लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर चिंता

बैठक में एक महत्वपूर्ण मुद्दा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी रहा। यदि ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बंद कर देता है, तो भारतीय तेल टैंकरों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। भारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति संकट जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सरकार ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग पर भी विचार किया है।

भारतीय नागरिकों की संख्या

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जबकि इज़राइल में 40,000 से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं। पूरे उपसागरीय और पश्चिम एशिया क्षेत्र में भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख बताई जाती है।

इन सभी नागरिकों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के लिए विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन सक्रिय हैं। संभावित निकासी योजना और आपातकालीन हेल्पलाइन व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।

सरकार की तैयारी और रणनीति

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष उड़ानों और नौसैनिक सहायता के जरिए नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने की योजना तैयार रखी गई है।

प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को समन्वय के साथ काम करने और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक कूटनीतिक प्रयास और क्षेत्रीय शांति के लिए भारत की भूमिका पर भी विचार किया गया। भारत लगातार सभी संबंधित देशों से संवाद बनाए हुए है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की त्वरित और रणनीतिक प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल सरकार हालात पर करीबी नजर रखे हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बहुस्तरीय योजना तैयार है।

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