दार्जिलिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बड़ा बयान: संताल सम्मेलन की व्यवस्था पर उठाए सवाल

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दार्जिलिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बयान

दार्जिलिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बड़ा बयान

President Droupadi Murmu’s Big Statement in Darjeeling: Raises Questions Over Arrangements for Santal Conference

अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारत की राष्ट्रपति
द्रौपदी मुर्मू ने अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के आयोजन को लेकर
प्रशासनिक व्यवस्था पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। राष्ट्रपति ने कहा कि
सम्मेलन जिस स्थान पर आयोजित किया गया, वह उचित नहीं था और इससे
संताल समुदाय के कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि दार्जिलिंग का यह स्थान इतना विशाल है कि यहां
लगभग पांच लाख लोग आसानी से एकत्र हो सकते थे, लेकिन प्रशासन ने
सम्मेलन के लिए किसी और स्थान को चुना।

शनिवार को अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि जब वह अंतरराष्ट्रीय
संताल सम्मेलन में भाग लेने के बाद यहां पहुंचीं, तब उन्हें यह महसूस हुआ
कि कार्यक्रम का आयोजन यहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह स्थान
काफी बड़ा और खुला है, जहां बड़ी संख्या में लोग आराम से शामिल हो सकते थे।

“आज अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन था। जब मैं वहां से यहां आई, तो मुझे लगा
कि अगर सम्मेलन यहीं होता तो ज्यादा अच्छा होता। यह जगह बहुत विशाल है।
मुझे समझ में नहीं आता कि प्रशासन के मन में क्या चल रहा था। उन्होंने कहा
कि वह स्थान भीड़भाड़ वाला है, लेकिन मुझे लगता है कि यहां पांच लाख लोग
भी आसानी से आ सकते हैं।” – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सम्मेलन का स्थान दूर होने के कारण कई
संताल समुदाय के लोग कार्यक्रम तक पहुंच ही नहीं सके। इससे उन्हें
काफी दुख हुआ। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन संताल समुदाय के लिए
बहुत महत्वपूर्ण था और इसमें उनकी अधिकतम भागीदारी होनी चाहिए थी।

संताल समुदाय की भागीदारी पर चिंता

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि जब उन्होंने वहां की स्थिति देखी,
तो उन्हें लगा कि शायद प्रशासन ने यह सोचकर स्थान का चयन किया कि
लोग वहां तक पहुंच नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर कार्यक्रम का उद्देश्य
संताल समुदाय को जोड़ना था, तो इसे ऐसी जगह आयोजित किया जाना
चाहिए था जहां लोग आसानी से पहुंच सकें।

“मुझे बहुत दुख है कि यहां के लोग सम्मेलन तक पहुंच नहीं पाए क्योंकि
कार्यक्रम इतनी दूर आयोजित किया गया था। शायद प्रशासन ने सोचा होगा
कि कोई भी वहां नहीं पहुंचेगा और राष्ट्रपति केवल कार्यक्रम में शामिल होकर
वापस लौट जाएंगी।” – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति का यह बयान राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय
बन गया है। कई लोगों का मानना है कि इतने बड़े सम्मेलन के आयोजन
के लिए बेहतर योजना और स्थान का चयन होना चाहिए था।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर भी कही बड़ी बात

अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री
ममता बनर्जी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति
किसी स्थान का दौरा करती हैं, तो राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी
वहां उपस्थित होना चाहिए।

“अगर राष्ट्रपति किसी स्थान पर आती हैं, तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी
वहां आना चाहिए। लेकिन वे नहीं आईं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता दीदी
भी मेरी बहन हैं, मेरी छोटी बहन की तरह। मुझे नहीं पता कि वह मुझसे
नाराज थीं या नहीं, इसलिए ऐसा हुआ।” – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि अब तक इस विषय पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य सरकार
की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संताल समुदाय के लिए सम्मेलन का महत्व

अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन का उद्देश्य संताल समुदाय की संस्कृति,
इतिहास और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। इस
सम्मेलन में देश और विदेश से संताल समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक
कार्यकर्ता और शोधकर्ता शामिल होते हैं।

संताल समुदाय भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक है, जो
मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार के कई क्षेत्रों
में निवास करता है। इस समुदाय की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराएं और
भाषा भारतीय विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू स्वयं भी आदिवासी समुदाय से आती हैं और इसलिए
उनकी भावनाएं इस सम्मेलन से विशेष रूप से जुड़ी हुई मानी जाती हैं।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा

राष्ट्रपति के बयान के बाद दार्जिलिंग और पश्चिम बंगाल की राजनीति
में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि
इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासन को अधिक सावधानी
बरतनी चाहिए थी।

साथ ही, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के बीच संवाद और समन्वय को लेकर
भी कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है
कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया सामने
आ सकती है।