मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति एक महीने के भीतर रुक सकती है। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार का अहम हिस्सा है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराता खतरा: पुतिन की चेतावनी से दुनिया के तेल बाजार में हलचल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध की स्थिति के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक बड़ी चेतावनी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता पैदा कर दी है। पुतिन ने संकेत दिया है कि अगर मौजूदा हालात इसी तरह बढ़ते रहे तो आने वाले एक महीने के भीतर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक – हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) – से तेल की आपूर्ति रुक सकती है।
यह चेतावनी इसलिए बेहद गंभीर मानी जा रही है क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी संकरे मार्ग से होकर एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचता है। अगर इस मार्ग में किसी तरह की बाधा आती है तो इसका असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है हॉर्मुज जलडमरूमध्य?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री मार्ग है। इसकी चौड़ाई कुछ जगहों पर केवल 33 किलोमीटर के आसपास है, लेकिन इसके बावजूद यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम भूमिका निभाता है।
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से अपना तेल दुनिया के विभिन्न देशों तक भेजते हैं।
भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश इस क्षेत्र से आने वाले तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं। इसलिए अगर यह मार्ग बंद होता है तो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान युद्ध से बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में ईरान को लेकर जारी संघर्ष और बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि युद्ध की स्थिति और गंभीर हो जाती है तो ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसी रणनीतिक चाल चल सकता है।
ऐसा कदम वैश्विक राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए पहले से ही सैन्य मौजूदगी बनाए हुए हैं। अगर यहां किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई होती है तो यह संकट और गहरा सकता है।
वैश्विक तेल बाजार में बढ़ी चिंता
पुतिन की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में हलचल तेज हो गई है। निवेशक और ऊर्जा कंपनियां संभावित संकट को लेकर चिंतित हैं। यदि तेल आपूर्ति में बाधा आती है तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य कुछ दिनों के लिए भी बंद होता है तो वैश्विक तेल बाजार में भारी असंतुलन पैदा हो सकता है। इससे परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों की लागत भी तेजी से बढ़ सकती है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में से एक है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन प्रभावित होता है तो भारत के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा महंगाई बढ़ने का भी खतरा रहेगा, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने से कई अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।
क्या हो सकता है वैश्विक ऊर्जा संकट?
अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कई देशों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों या अन्य आपूर्ति मार्गों की तलाश करनी पड़ेगी।
हालांकि कुछ देशों ने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) तैयार कर रखे हैं, लेकिन लंबे समय तक संकट जारी रहने पर इन भंडारों से भी ज्यादा राहत मिलना मुश्किल हो सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और स्थिरता बेहद जरूरी है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो इसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
