विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश: हरित सामरम की पहल के तहत उत्तर आंध्र प्रदेश के जंगल क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महत्वाकांक्षी योजना प्रारंभ की गई है। वन विभाग के अधिकारियों एवं स्थानीय स्वयंसेवकों ने मिलकर सूखे प्रतिरोधी स्थानीय पौधों की 50 लाख बीज गेंदों का वितरण करने का लक्ष्य रखा है। यह कार्य जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा प्राकृतिक आवासों को पुनर्जीवित करने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
हरित सामरम अभियान के तहत इस बार बीज गेंदों को विशेष रूप से स्थानीय एवं सूखा सहनशील पेड़-पौधों के लिए चुना गया है, ताकि वे कठोर जलवायु में भी जीवित रह सकें और जंगलों की जैव विविधता बढ़ाने में मदद करें। बीज गेंदों के वितरण का उद्देश्य जमीन की गुणवता में सुधार करना, मृदा क्षरण को रोकना और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना है।
वन अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान खास तौर पर उन इलाकों में चलाया जाएगा जहां जंगल सिकुड़ रहे हैं और सूखे का असर ज्यादा है। स्वयंसेवक, ग्राम पंचायतों के लोग एवं छात्र भी इस मुहिम में सहयोग देंगे। बीज गेंदों को जंगलों में विभिन्न स्थानों पर छिड़कना होगा जिससे वहां नई पौधों की शुरुआत हो सके। इस पहल से ना केवल वन क्षेत्र बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय जैविक संतुलन भी मजबूत होगा।
इस अवसर पर वन प्रमंडल कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह अभियान हमारी सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का हिस्सा है। हमें प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करना होगा।” उन्होंने ग्रामीण निवासियों को भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया ताकि हरित क्षेत्र पुनः समृद्ध हो और आगामी पीढ़ी के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि उपलब्ध स्थानीय पौधों के बीजहरवल से न केवल जल संरक्षण होगा बल्कि खेती में भी सहायता मिलेगी, क्योंकि इन पौधों के कारण मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और जलस्तर में सुधार होगा। हरित सामरम के तहत इस वर्ष कलिंगा, विशाखापत्तनम, सrikakulam, विजयनगरम और आसपास के इलाकों में बीज गेंदों का वितरण जारी रहेगा।
वन विभाग ने इस पहल के सफल होने के लिए सभी नागरिकों से सहयोग और जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक दायित्व है। अगर हम सभी मिलकर काम करें तो सूखे प्रभावित क्षेत्रों में जीवनयापन बेहतर हो सकेगा और प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित होगा।
यह अभियान जल, मृदा और पेड़-पौधों को बचाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है, जो आने वाले वर्षों में उत्तर आंध्र प्रदेश के पर्यावरणीय स्वास्थ्य को मजबूती देगा। हरित सामरम के इस प्रयास से न केवल वन क्षेत्र का विस्तार होगा बल्कि स्थानीय समुदायों में पर्यावरण संवेदनशीलता भी बढ़ेगी, जो एक स्थायी भविष्य के लिए अनिवार्य है।
