यूथ बेरोजगारी से निपटने में मदद के लिए पूर्व M

Ex-M&S chief to help government tackle youth unemployment

लंदन, इंग्लैंड – युवा बेरोजगारी को लेकर सरकार ने एक नई पहल की है जिसमें पूर्व M&S के प्रमुख मार्क बोलैंड सरकार को मार्गदर्शन देंगे। हाल ही में हुई समीक्षा में एक ‘खोई हुई पीढ़ी’ के रूप में युवाओं की स्थिति पर गंभीर चेतावनी दी गई थी। इस समीक्षा में यह पाया गया कि बेरोजगारी की समस्या युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही है और इससे देश की युवा शक्ति को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

मार्क बोलैंड, जो मर्केंडाइज़िंग और खुदरा क्षेत्र में अपने सफल नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं, को सरकार द्वारा इस प्रस्ताव के तहत नियुक्त किया गया है ताकि युवा वर्ग को रोजगार प्राप्त करने के लिए प्रभावी रणनीतियां विकसित की जा सकें। उनका अनुभव युवाओं को व्यावसायिक कौशल प्रदान करने और उन्हें नौकरी के अवसरों से जोड़ने में कारगर साबित होगा।

सरकार के रोजगार विभाग ने इस कदम को एक महत्वपूर्ण पहल बताया है, जो युवा बेरोजगारी की दर को कम करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा है कि इस चुनौती से निपटना राष्ट्रीय प्राथमिकता है और मार्क बोलैंड का अनुभव इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नई तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण योजनाओं की आवश्यकता है जो उन्हें प्रतिस्पर्धी बाजार के लिए तैयार करें। मार्क बोलैंड की भूमिका इन पहलों को धरातल पर लाने और उन्हें सफल बनाने में सहायक होगी।

बेरोजगारी की बढ़ती समस्या का समाधान निकालना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, खासकर कोविड-19 महामारी के बाद जहां रोजगार के अवसर सीमित हुए हैं। मार्क बोलैंड के मार्गदर्शन से युवाओं को सशक्त बनाने वाले कई कार्यक्रम शुरू किए जाने की उम्मीद है।

सरकार ने बताया कि इस पहल के तहत विभिन्न क्षेत्रों के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा ताकि युवाओं को दी जाने वाली ट्रेनिंग अधिक प्रभावी और रोजगार के अनुकूल हो। साथ ही, व्यापारिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।

मीडिया से बातचीत में मार्क बोलैंड ने कहा, “युवाओं में अनगिनत क्षमताएं और संभावनाएं हैं। केवल हमें सही दिशा और अवसर प्रदान करना होगा ताकि वे अपने और देश के लिए बेहतर भविष्य बना सकें। मैं इस चुनौती को पूरी लगन से निभाना चाहता हूँ।”

इस पहल से युवाओं को रोजगार मिलने की संभावनाएं बेहतर होंगी और वे अपने कौशल को सही दिशा में विकसित कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू हुई, तो यह भविष्य की युवा पीढ़ी के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी।

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