
नगरपालिका भर्ती घोटाला: ईडी के सामने पेश हुए टीएमसी विधायक मदन मित्र, परिवार पहले से जांच के दायरे में
पत्नी और दोनों बेटों से पूछताछ के बाद अब ईडी के सामने पहुंचे कामरहाटी के विधायक, कहा- ‘मैं जांच में पूरा सहयोग करूंगा’
पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कामरहाटी विधायक मदन मित्र से भी पूछताछ शुरू कर दी है। बुधवार को मदन मित्र कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी कार्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों ने उनसे कथित अवैध नियुक्तियों और वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल-जवाब किए।
इससे पहले पिछले सप्ताह ईडी ने मदन मित्र के दोनों बेटों और उनकी पत्नी अर्चना मित्र से लंबी पूछताछ की थी। परिवार के लगातार ईडी के रडार पर आने के बाद अब खुद विधायक की पेशी को जांच के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
ईडी कार्यालय पहुंचने से पहले क्या बोले मदन मित्र?
बुधवार सुबह लगभग 11 बजे मदन मित्र अपने कोलकाता स्थित आवास से निकले और सीधे सीजीओ कॉम्प्लेक्स पहुंचे। उस समय उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा पहन रखा था और आंखों पर काला चश्मा लगाया हुआ था। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देंगे।
मदन मित्र ने कहा,
“मैं जांच में पूरा सहयोग करूंगा। ईडी ने जिन दस्तावेजों को लाने के लिए कहा था, वे सभी दस्तावेज मैं साथ लेकर आया हूं। मेरा किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से कोई संबंध नहीं है। जांच एजेंसी जिसे उचित समझे, उसे पूछताछ के लिए बुला सकती है।”
उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह जांच में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालेंगे।
पहले पत्नी और दोनों बेटों से हुई थी लंबी पूछताछ
ईडी ने सबसे पहले मदन मित्र के छोटे बेटे शुभरूप मित्र को पूछताछ के लिए बुलाया था। उनसे लगभग नौ घंटे तक लगातार सवाल-जवाब किए गए। इसके अगले दिन बड़े बेटे स्वरूप मित्र भी ईडी कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे भी कई घंटों तक पूछताछ चली।
इसके बाद शुक्रवार को मदन मित्र की पत्नी अर्चना मित्र को भी सीजीओ कॉम्प्लेक्स बुलाया गया। उनसे परिवार की संपत्ति, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन तथा कथित नियुक्तियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की गई।
अब परिवार के लगभग सभी प्रमुख सदस्यों से पूछताछ के बाद ईडी ने स्वयं मदन मित्र को तलब किया है।
राजनीतिक घटनाक्रम ने भी बढ़ाई चर्चा
ईडी का नोटिस मिलने के बाद मदन मित्र के राजनीतिक रुख को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई थीं। हाल ही में उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक रुख से अलग होकर एक नए गुट के साथ जाने का फैसला किया था। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया।
इसी दौरान मदन मित्र का एक बयान भी काफी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें ईडी से ज्यादा एक विशेष राजनीतिक नेतृत्व से डर लगता है। हालांकि बाद में उन्होंने साफ किया कि वह जांच एजेंसी के साथ हर स्तर पर सहयोग करेंगे और कानून का सम्मान करेंगे।
क्या है नगरपालिका भर्ती घोटाला?
ईडी की जांच के अनुसार टिटागढ़ नगरपालिका में कथित तौर पर बड़ी संख्या में नियुक्तियां नियमों का पालन किए बिना की गईं। जांच एजेंसी का दावा है कि लगभग 125 लोगों को भारी रकम लेकर नौकरी दिलाई गई।
इसी कथित भर्ती घोटाले की जांच के दौरान ईडी को कुछ ऐसे दस्तावेज और वित्तीय जानकारी मिली, जिनके आधार पर मदन मित्र का नाम जांच के दायरे में आया। इसके बाद एजेंसी ने उनके कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया था।
इस दौरान विधायक के आवास, कार्यालय तथा अन्य संबंधित स्थानों पर दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई थी। हालांकि मदन मित्र लगातार अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
ईडी किन पहलुओं की कर रही है जांच?
सूत्रों के अनुसार ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नियुक्तियों के बदले किसी प्रकार का अवैध वित्तीय लेनदेन हुआ था या नहीं। जांच एजेंसी विशेष रूप से बैंक खातों, संपत्ति के रिकॉर्ड, नकद लेनदेन तथा संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
बताया जा रहा है कि परिवार से बैंक संबंधी कई दस्तावेज, आय के स्रोत, संपत्ति का विवरण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी यह समझने की कोशिश करेगी कि कथित भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की आर्थिक अनियमितता हुई थी या नहीं।
पहले भी हो चुकी है पूछताछ
यह पहली बार नहीं है जब मदन मित्र ईडी के सामने पेश हुए हैं। इससे पहले भी इसी मामले में उनसे पूछताछ की जा चुकी है। हालांकि जांच अभी भी जारी है और एजेंसी नए सिरे से मिले दस्तावेजों तथा परिवार के सदस्यों के बयानों का मिलान कर रही है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों से मिले जवाबों और बैंक रिकॉर्ड की तुलना करने के बाद आगे की जांच की दिशा तय होगी।
आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है। विपक्ष इस मामले को भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बता रहा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि ईडी की पूछताछ में मदन मित्र क्या जानकारी देते हैं और जांच एजेंसी को उनके जवाबों तथा दस्तावेजों से क्या नए तथ्य प्राप्त होते हैं। यदि जांच में नए साक्ष्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण कार्रवाई देखने को मिल सकती है। फिलहाल ईडी दस्तावेजों की जांच, बैंक रिकॉर्ड के विश्लेषण और पूछताछ के आधार पर पूरे कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
