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Forest officials, volunteers to disperse 50 lakh seed balls in north Andhra Pradesh

वन अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने उत्तर आंध्र प्रदेश में 50 लाख बीज गेंदों का वितरण

विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश: हरित सामरम की पहल के तहत उत्तर आंध्र प्रदेश के जंगल क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महत्वाकांक्षी योजना प्रारंभ की गई है। वन विभाग के अधिकारियों एवं स्थानीय स्वयंसेवकों ने मिलकर सूखे प्रतिरोधी स्थानीय पौधों की 50 लाख बीज गेंदों का वितरण करने का लक्ष्य रखा है। यह कार्य जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा प्राकृतिक आवासों को पुनर्जीवित करने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। हरित सामरम अभियान के तहत इस बार बीज गेंदों को विशेष रूप से स्थानीय एवं सूखा सहनशील पेड़-पौधों के लिए चुना गया है, ताकि वे कठोर जलवायु में भी जीवित रह सकें और जंगलों की जैव विविधता…

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Young people out of work or training costing UK £125bn as report warns of 'perfect storm'

युवा बेरोजगार या प्रशिक्षण से बाहर, UK को 125 अरब पाउंड का नुकसान: रिपोर्ट ने

लंदन, यूके – एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम में 16 से 24 वर्ष की आयु के उन युवाओं की संख्या जो न तो काम पर हैं, न ही शिक्षा या प्रशिक्षण में शामिल हैं, आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। यह संख्या 2031 तक 1.25 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे देश को भारी आर्थिक तथा सामाजिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में इस स्थिति को ‘खोई हुई पीढ़ी’ के नाम से संबोधित किया गया है, जो यूके की बढ़ती बेरोजगारी दर और युवाओं की शिक्षा तथा कौशल विकास की कमी का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह…

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Anik Dutta obituary: The filmmaker who captured Kolkata’s nostalgia and decay

अनिक दत्ता का निधन: कोलकाता की नॉस्टैल्जिया और पतन को कैद करने वाले फिल्मकार

कोलकाता, पश्चिम बंगाल – बंगाली सिनेमा के लोकप्रिय और प्रभावशाली फिल्मकार अनिक दत्ता का निधन स्थानीय सिनेमा प्रेमियों के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने विलक्षण दृष्टिकोण और संवेदनशील कहानी कहने की कला से बंगाली समाज की मध्यम वर्ग की चिंताओं को बेहतरीन अंदाज में प्रस्तुत किया। उनके फिल्मी सफर की शुरुआत “भूतের ভবিষ্যৎ” जैसी हास्यस्पद, लेकिन गहरी राजनीति और सामाजिक व्यंग्य से हुई, जिसने मानव जीवन की विडंबनाओं को बड़े ही सूक्ष्म ढंग से दिखाया। अनिक दत्ता की फिल्मों में बंगाल की सांस्कृतिक असुरक्षा, मध्यम वर्ग की बेचैनी, और आधुनिकता की त्रासद हास्यास्पदताएं न केवल उपस्थिति पण बल्कि तीखे संवादों और हास्य से भरपूर थीं। उनकी फिल्म “अपराजितो”…

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