घिरीजा जयाराज की ‘वांडरलैंड’ नृत्य, विस्थापन और सपनों की पड़ताल करती है
नई दिल्ली, भारत – “वांडरलैंड” नामक प्रस्तुति ने गतिशीलता और स्मृति के परतदार सफर को दर्शाया, जिसमें विरासत और समकालीन आवाज़ों को मिलाकर विस्थापित लोगों के संघर्षों और आकांक्षाओं को उजागर किया गया। यह प्रोडक्शन दर्शकों को एक अनूठे नृत्य अनुभव के माध्यम से विस्थापन की जटिलताओं से रूबरू कराता है। इस नृत्य नाटक की खासियत इसकी बहुआयामी प्रस्तुति है जिसने सांस्कृतिक विरासत को आज की सामाजिक चुनौतियों से जोड़ने का काम किया है। कलाकारों ने अपनी गतियों के माध्यम से न केवल शारीरिक यात्रा बल्कि मानसिक और भावनात्मक सफर को भी उभारा। कलाकारों ने स्मृतियों को जीवंत किया और ऐसे लोगों की कहानियों को मंच पर लाया जो अपने…
