भारत–कनाडा का बड़ा आर्थिक दांव: 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य, CEPA वार्ता तेज

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भारत कनाडा व्यापार 2030
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भारत–कनाडा व्यापार लक्ष्य 50 अरब डॉलर


भारत–कनाडा ने 2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्य, CEPA वार्ता को मिली रफ्तार

नई दिल्ली/ओटावा: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और कनाडा ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर वार्ता को तेज करने पर सहमति बनी है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक खनिजों की उपलब्धता जैसे मुद्दे दुनिया भर में अहम बन चुके हैं।

CEPA वार्ता को नई गति

दोनों देशों के नेताओं ने CEPA के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर सहमति जताते हुए आधिकारिक रूप से वार्ता को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को सरल बनाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और टैरिफ बाधाओं को कम करने पर केंद्रित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि CEPA लागू होने के बाद कृषि, आईटी, फार्मा, ऑटोमोबाइल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिल सकता है।

भारत के लिए कनाडा एक महत्वपूर्ण साझेदार है, खासकर ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में। वहीं, कनाडा भारत को एक विशाल उपभोक्ता बाजार और उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में देखता है।

क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम पर सहयोग

बैठक के दौरान क्रिटिकल मिनरल्स यानी लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ तत्वों पर विशेष चर्चा हुई। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और हाई-टेक उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं। भारत अपनी हरित ऊर्जा रणनीति और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत इन संसाधनों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है।

कनाडा, जो प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, भारत के लिए एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बन सकता है। दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी हुआ।

इसके अलावा, यूरेनियम आपूर्ति पर भी चर्चा हुई। भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए कनाडा की भूमिका अहम हो सकती है। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।

रक्षा सहयोग में विस्तार

भारत और कनाडा ने रक्षा सहयोग को भी नई दिशा देने की इच्छा जाहिर की। समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर यह साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों लोकतांत्रिक देशों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।

शिक्षा, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

दोनों देशों के बीच शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में भी मजबूत रिश्ते हैं। हजारों भारतीय छात्र कनाडा में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। नई पहल के तहत अनुसंधान, इनोवेशन और स्टार्टअप सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक और कृषि नवाचार जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।

व्यापार संतुलन और निवेश अवसर

वर्तमान में भारत और कनाडा के बीच व्यापार लगभग 10-12 अरब डॉलर के आसपास है। 50 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए दोनों देशों को निवेश, लॉजिस्टिक्स, और नीतिगत सुधारों पर विशेष ध्यान देना होगा।

भारतीय कंपनियां कनाडा के इंफ्रास्ट्रक्चर, खनन और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ा सकती हैं, जबकि कनाडाई निवेशक भारत के मैन्युफैक्चरिंग, टेक और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अवसर तलाश रहे हैं।

वैश्विक संदर्भ में महत्व

यह साझेदारी केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक देशों का सहयोग बहुपक्षीय मंचों पर संतुलन बनाने में मदद करेगा।

2030 तक 50 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और आर्थिक संभावनाएं इसे संभव बना सकती हैं। CEPA वार्ता की सफलता इस दिशा में निर्णायक साबित होगी।

भारत–कनाडा संबंधों का यह नया अध्याय आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

निष्कर्ष: भारत और कनाडा के बीच गहराता सहयोग आने वाले वर्षों में न केवल व्यापारिक आंकड़ों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि रणनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करेगा। 2030 का लक्ष्य दोनों देशों के लिए एक साझा आर्थिक विजन का प्रतीक बन चुका है।