
एलपीजी संकट की मार: मेघालय का ₹5 भोजन देने वाला ‘आहार’ कम्युनिटी किचन पहली बार बंद
करीब 3,858 दिनों तक लगातार सेवा देने के बाद गैस की कमी से रुका गरीबों का सहारा
मेघालय से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां वर्षों से गरीबों और जरूरतमंदों को मात्र ₹5 में भोजन उपलब्ध कराने वाला प्रसिद्ध ‘आहार’ कम्युनिटी किचन अब बंद हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह किचन 26 मार्च को एलपीजी (रसोई गैस) की भारी कमी के कारण बंद करना पड़ा।
यह किचन शिलांग के झालूपारा टैक्सी स्टैंड पर स्थित था और प्रतिदिन करीब 200 लोगों को सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराता था। खास बात यह है कि यह सेवा पिछले 3,858 दिनों से लगातार बिना किसी रुकावट के चल रही थी, लेकिन पहली बार गैस संकट के चलते इसे बंद करना पड़ा।
गरीबों के लिए जीवनरेखा था ‘आहार’ किचन
इस कम्युनिटी किचन की शुरुआत वर्ष 2018 में ‘अर्धेंदु चौधुरी चैरिटेबल ट्रस्ट’ द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य शहर के गरीब, दिहाड़ी मजदूर, टैक्सी चालक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सस्ती और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना था।
₹5 में मिलने वाला यह भोजन न केवल सस्ता था, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरत भी बन गया था। कई लोगों के लिए यह किचन एकमात्र ऐसा स्थान था जहां वे भरपेट खाना खा सकते थे।
एलपीजी संकट बना मुख्य कारण
अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव और संघर्ष का असर भारत में एलपीजी सप्लाई पर भी पड़ा है। गैस सिलेंडरों की उपलब्धता में कमी आने के कारण किचन संचालन में भारी मुश्किलें आ रही थीं।
हालांकि सरकारी स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कई जगहों पर गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, जिससे छोटे व्यवसाय और सामाजिक सेवाएं बाधित हो रही हैं।
स्थानीय लोगों में निराशा
किचन के बंद होने से स्थानीय लोगों में निराशा फैल गई है। रोजाना यहां भोजन करने वाले कई लोगों ने चिंता जताई है कि अब उन्हें सस्ता भोजन कहां मिलेगा।
एक स्थानीय टैक्सी चालक ने कहा, “हमारे जैसे लोगों के लिए यह किचन बहुत बड़ी मदद था। अब हमें ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे, जो हमारे लिए मुश्किल है।”
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस घटना के बाद प्रशासन की तैयारियों और दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं। जब सरकार एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रही है, तो फिर इस तरह के जरूरी सामाजिक प्रकल्प क्यों प्रभावित हो रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति को सामान्य नहीं किया गया, तो इस तरह के कई अन्य सामाजिक और छोटे स्तर के व्यवसाय भी प्रभावित हो सकते हैं।
फिर से शुरू करने की कोशिश
ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा है कि वे जल्द से जल्द किचन को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वैकल्पिक इंतजाम और गैस की व्यवस्था करने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यह किचन सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग के लिए एक उम्मीद है, जिसे हर हाल में जारी रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
मेघालय का ‘आहार’ किचन केवल एक भोजन केंद्र नहीं था, बल्कि यह सामाजिक सहयोग और मानवता का प्रतीक था। एलपीजी संकट के कारण इसका बंद होना यह दर्शाता है कि वैश्विक घटनाओं का असर स्थानीय स्तर पर कितना गहरा हो सकता है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यह किचन कब फिर से शुरू होगा और क्या सरकार इस तरह की सेवाओं को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
