
West Bengal elections 2026 phase 1
कोलकाता, 23 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस मतदान में राज्य के 16 जिलों की 152 सीटों पर वोट डाले गए। भारी गर्मी के बावजूद मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और कई जगहों पर लंबी कतारें लगी रहीं। चुनाव आयोग के शुरुआती अनुमान के अनुसार इस चरण में 85% से अधिक मतदान दर्ज हो सकता है, जबकि कुछ इलाकों में यह आंकड़ा 90% के करीब पहुंच गया।
इस चरण में जिन प्रमुख जिलों में मतदान हुआ उनमें कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कालिम्पोंग, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम बर्धमान और बीरभूम शामिल हैं। ये सभी इलाके राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाते हैं क्योंकि इनमें सीमावर्ती क्षेत्र, पहाड़ी इलाके, जंगलमहल और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र शामिल हैं।
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर भारी भीड़ देखने को मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान तेज गति से हुआ, जबकि शहरों में शुरुआत धीमी रही लेकिन दोपहर के बाद तेजी आई। महिलाओं और युवा मतदाताओं की भागीदारी इस बार खास तौर पर अधिक रही। पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में भी खास उत्साह देखा गया। दोपहर तक कई बूथों पर 50-60% मतदान हो चुका था, जो शाम तक बढ़कर 80% से ज्यादा हो गया।
हालांकि मतदान के दौरान कुछ स्थानों से हिंसा और गड़बड़ी की खबरें भी सामने आईं। मुर्शिदाबाद में राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच झड़प, पत्थरबाजी और बमबाजी की घटनाएं सामने आईं। मालदा में बूथ कब्जाने और मतदाताओं को डराने के आरोप लगे। उत्तर दिनाजपुर में कुछ जगहों पर EVM खराब होने की शिकायत आई, जिससे मतदान कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। जंगलमहल के कुछ हिस्सों में भी हल्का तनाव देखने को मिला। हालांकि केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में कर लिया गया।
सुरक्षा के लिहाज से इस बार चुनाव में व्यापक इंतजाम किए गए थे। हजारों केंद्रीय बलों की तैनाती, 8000 से अधिक संवेदनशील बूथों की पहचान, CCTV निगरानी, वेबकास्टिंग और ड्रोन के जरिए नजर रखी गई। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।
राजनीतिक मुकाबले की बात करें तो इस चरण में मुख्य लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच देखने को मिली। इसके अलावा कांग्रेस और वाम दल भी मैदान में हैं और कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। उत्तर बंगाल में भाजपा की मजबूत पकड़ मानी जा रही है, जबकि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में तृणमूल और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। जंगलमहल में विकास के मुद्दे पर तृणमूल अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दार्जिलिंग, कूचबिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया और बांकुड़ा जैसे जिलों की सीटें इस चरण में खास फोकस में रहीं। इन सीटों के नतीजे पूरे चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। मतदाताओं की राय भी अलग-अलग रही—कुछ ने शांतिपूर्ण मतदान की सराहना की, जबकि कुछ ने गड़बड़ी की शिकायत की।
चुनाव आयोग के अनुसार अधिकांश स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा और जहां भी समस्या हुई, वहां तुरंत कार्रवाई की गई। फिलहाल पुनर्मतदान की जरूरत नहीं बताई गई है। राजनीतिक दलों ने अपने-अपने दावे किए हैं—तृणमूल कांग्रेस ने विकास के मुद्दे पर जनता का समर्थन मिलने का दावा किया, जबकि भाजपा ने कई जगहों पर हिंसा और धांधली के आरोप लगाए। कांग्रेस और वाम दलों ने भी चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि पहले चरण में उच्च मतदान प्रतिशत चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा मतदान स्थानीय मुद्दों की अहमियत को दर्शाता है, जबकि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी चुनावी समीकरण बदल सकती है।
अब सभी की नजर अगले चरण पर है, जो 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। पहले चरण का मतदान यह साफ संकेत देता है कि पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है और अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में है।
