
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: रिकॉर्ड मतदान के बीच विवाद, लापरवाही और ‘छाप्पा वोट’ के आरोप
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनाव 2026 के दौरान एक तरफ जहां मतदाताओं की भारी भागीदारी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ कई जगहों से विवाद, प्रशासनिक लापरवाही और ‘छाप्पा वोट’ के आरोप सामने आ रहे हैं। चुनाव आयोग भले ही मतदान को “कुल मिलाकर शांतिपूर्ण” बता रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर कई घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
मतदान प्रतिशत में तेजी, लेकिन बढ़ रहे सवाल
राज्य के विभिन्न जिलों में मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। कई इलाकों में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। चुनाव आयोग के अनुसार, कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान प्रक्रिया सामान्य रही। हालांकि, विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
पिंगला में बड़ा प्रशासनिक चूक
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पिंगला इलाके के 9 नंबर बूथ से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। आरोप है कि प्रीसाइडिंग ऑफिसर सहित सभी मतदान कर्मी बूथ को खाली छोड़कर लंच के लिए बाहर चले गए।
इस दौरान बूथ पूरी तरह से खाली रहा, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे। घटना की जानकारी मिलते ही चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रीसाइडिंग ऑफिसर और अन्य मतदान कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
इसके बाद रिजर्व टीम को भेजकर मतदान प्रक्रिया को फिर से शुरू कराया गया। आयोग ने इस घटना को “गंभीर लापरवाही” करार दिया है।
नानूर,Siliguri में ‘छाप्पा वोट’ का आरोप
Siriguri,बीरभूम जिले के नानूर (119 नंबर बूथ) में एक महिला मतदाता ने आरोप लगाया कि जब वह वोट देने पहुंचीं, तो उन्हें बताया गया कि उनका वोट पहले ही डाला जा चुका है।
इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। आरोप है कि किसी अन्य व्यक्ति ने उनके नाम पर फर्जी तरीके से वोट डाल दिया। चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी की पहचान कर गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।
दुर्गापुर और हल्दिया में ईवीएम खराब
दुर्गापुर के 161 नंबर बूथ पर ईवीएम मशीन अचानक खराब हो गई, जिससे कुछ समय के लिए मतदान बाधित रहा। इसी तरह हल्दिया के बसंतपुर क्षेत्र के एक बूथ पर भी ईवीएम में खराबी की शिकायत आई।
तकनीकी टीमों को मौके पर भेजकर मशीनों को ठीक किया गया, जिसके बाद मतदान दोबारा शुरू हुआ। हालांकि, इन घटनाओं ने मतदाताओं के बीच असंतोष पैदा किया।
डोमकल में हिंसा, 300 परिवारों ने नहीं डाला वोट
मुर्शिदाबाद जिले के डोमकल में एक दिन पहले टीएमसी और सीपीएम कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में कई लोग घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हिंसा के डर से लगभग 300 परिवारों ने मतदान नहीं किया। उनका कहना है कि वोट देने जाने पर उन्हें धमकियां दी गईं। हालांकि, बाद में प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने का दावा किया।
बरुआ में ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप
मुर्शिदाबाद के बरुआ (186 नंबर बूथ) से ईवीएम में छेड़छाड़ का गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार, अगर कोई मतदाता 1 नंबर (टीएमसी) को वोट देता है, तो वोट 4 नंबर (बीजेपी) में चला जा रहा है।
इस आरोप ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया। चुनाव आयोग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
नवदा में एजेंट को रोके जाने का आरोप

नवदा में कांग्रेस नेता हुमायूं कबीर के एजेंट को बूथ में प्रवेश से रोके जाने का आरोप लगा है। इसके बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प और बहस की स्थिति पैदा हो गई।

घटना के बाद प्रशासन ने स्थिति को संभाला, लेकिन राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
नंदीग्राम में बीजेपी एजेंट को हटाने का आरोप
नंदीग्राम से भी शिकायत आई है कि बीजेपी के एजेंट को बूथ में बैठने नहीं दिया गया और उसे बाहर निकाल दिया गया। इस घटना को लेकर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और चुनाव आयोग से शिकायत की है।
कुमारगंज में 5 गिरफ्तार
कुमारगंज में चुनावी गड़बड़ी के आरोप में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग की सख्ती
इन सभी घटनाओं के बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से बातचीत की और पूरे मामले पर नजर रखने के निर्देश दिए। आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को सजा दी जाएगी।
निष्कर्ष: उत्साह और विवाद साथ-साथ
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में एक ओर जहां मतदाताओं का उत्साह और भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं दूसरी ओर सामने आ रही घटनाएं चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों की जांच कैसे करता है और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
कुल मिलाकर, यह चुनाव एक तरफ लोकतंत्र का उत्सव है, तो दूसरी तरफ कई चुनौतियों की परीक्षा भी।
