बंगाल चुनाव 2026: टीएमसी का दावा—58 लाख वोटर हटे, ममता बनर्जी को मिलेगा भारी जनसमर्थन

1000191462

1000191462




बंगाल चुनाव 2026: टीएमसी उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार का बड़ा दावा


बंगाल चुनाव 2026: टीएमसी का बड़ा दावा — “लोग ममता बनर्जी के पक्ष में वोट कर रहे हैं”

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने मतदाता सूची में नाम हटाने, मतदान प्रतिशत और चुनावी हिंसा को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

जय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। उनके अनुसार, यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला है और इससे आम मतदाताओं में असंतोष बढ़ा है।

“58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए”

टीएमसी नेता ने दावा किया कि इस प्रक्रिया में लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा, “बंगाल में आमतौर पर 80–85 प्रतिशत मतदान होता है, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में लोगों के नाम ‘एब्सेंटी वोटर’ कहकर हटा दिए गए। यह एक गंभीर मामला है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं को ‘अनुपस्थित’ बताया गया, उनमें से कई लोग नियमित रूप से चुनाव में भाग लेते रहे हैं। इस कदम को उन्होंने “लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन” बताया।

“लोकतंत्र का त्योहार है बंगाल में मतदान”

जय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र का त्योहार है। उन्होंने कहा, “बंगाल में लोग चुनाव को उत्सव की तरह मनाते हैं। यहां मतदान हमेशा उत्साह के साथ होता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में जो रुझान देखने को मिला था, वही संकेत इस बार भी नजर आ रहा है। उनके मुताबिक, जनता का समर्थन एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पक्ष में है।

“टीएमसी की सीटें बढ़ेंगी”

टीएमसी उपाध्यक्ष ने दावा किया कि इस बार उनकी पार्टी पहले से ज्यादा सीटें जीतने जा रही है। उन्होंने कहा, “जो माहौल बन रहा है, उससे साफ है कि लोग ममता बनर्जी के पक्ष में वोट कर रहे हैं और टीएमसी की सीटों की संख्या बढ़ेगी।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के दावे चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बढ़ाया जाता है।

चुनावी हिंसा पर चुनाव आयोग को ठहराया जिम्मेदार

जय प्रकाश मजूमदार ने राज्य में हो रही चुनावी हिंसा को लेकर भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जो हिंसा हो रही है, उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।”

उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है।

“कश्मीर से ज्यादा सीआरपीएफ बंगाल में”

टीएमसी नेता ने कहा, “इतने सीआरपीएफ जवान बंगाल में तैनात हैं, जितने कश्मीर में भी नहीं हैं। इसके बावजूद अगर हिंसा हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग को लेनी होगी।”

उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि टीएमसी हार के डर से इस तरह के बयान दे रही है।

विपक्ष ने किया पलटवार

हालांकि, विपक्षी दलों ने जय प्रकाश मजूमदार के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से चुनाव करा रहा है और सुरक्षा बलों की तैनाती मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में हिंसा के लिए सत्तारूढ़ दल जिम्मेदार है और वह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहा है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस

इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है। एक ओर सत्तारूढ़ दल आयोग पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष आयोग का समर्थन कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आरोप-प्रत्यारोप चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के साथ ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। टीएमसी और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

अब देखना यह होगा कि जनता का अंतिम फैसला किसके पक्ष में जाता है और क्या टीएमसी अपने दावे के अनुसार सीटों की संख्या बढ़ा पाती है या नहीं।