ओस्लो, नॉर्वे – पहली बार 43 वर्षों में भारत के प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय यात्रा, और 2022 के बाद पहला नॉर्डिक शिखर सम्मेलन, इस सप्ताह यहाँ शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण दौरे का उद्देश्य भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, और वैश्विक संघर्षों जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्डिक देशों की यात्रा पर हैं, जहां वे नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा दोनों पक्षों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि यह दौरा भारत की विदेश नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होगा।
इस सम्मेलन में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नॉर्डिक देश अपनी नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, और भारत इन तकनीकों को अपनाकर अपने ऊर्जा स्रोतों को स्वच्छ और टिकाऊ बनाना चाहता है। दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हो सकते हैं।
व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नॉर्डिक देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूती देने की योजना है। डिजिटल क्षेत्रों, स्वास्थ्य सेवा, और तकनीकी नवाचारों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौते होने की संभावना है। दोनों तरफ के व्यवसायी इस दौरे को नए अवसरों की खोज के रूप में देख रहे हैं।
वैश्विक संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय शांति को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्डिक नेताओं के बीच चर्चा होगी। मध्य पूर्व की स्थिति, यूक्रेन संकट और अन्य क्षेत्रीय मतभेदों पर विचार-विमर्श कर, वे वैश्विक स्थिरता के लिए साझा रणनीतियाँ खोजने का प्रयास करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे के दौरान हुए समझौतों और वार्तालापों से भारत-नॉर्डिक देशों के संबंधों में नया आयाम आएगा, जो दोनों पक्षों की रणनीतिक प्राथमिकताओं को पूरा करेगा। इस तरह, यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक सहयोग को भी नई दिशा देगी।
