NEET Protest Row: 23 दिन बाद बोले धर्मेंद्र प्रधान, कहा- छात्रों को केवल आक्रोश नहीं, जवाब भी चाहिए

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NEET विवाद पर 23 दिन बाद बोले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, कहा- छात्रों को जवाब देना हमारी जिम्मेदारी

NEET विवाद पर 23 दिन बाद बोले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, कहा- ‘छात्रों को केवल आक्रोश नहीं, जवाब भी मिलना चाहिए’

नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 दिनों की चुप्पी के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों को केवल नाराजगी या राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि उनके सवालों के स्पष्ट और जिम्मेदार जवाब मिलने चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में कहा, “हम अपने छात्रों के प्रति केवल आक्रोश व्यक्त करने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि उन्हें जवाब देना भी हमारी जिम्मेदारी है।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब NEET परीक्षा को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है और छात्रों के भविष्य को लेकर देशभर में चर्चा जारी है।

राहुल गांधी पर साधा निशाना

शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी छात्रों की वास्तविक समस्याओं के समाधान की बजाय उन्हें राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि लोकतांत्रिक बहस की जगह राजनीतिक प्रदर्शन को प्राथमिकता देना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीति करने से समाधान नहीं निकल सकता। सरकार का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान निकालना है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।

प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन पर टिप्पणी

धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उनका आरोप है कि यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के दौरान व्यवधान पैदा करने के उद्देश्य से किया गया था।

उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और यदि किसी मुद्दे पर गंभीर बहस करनी है तो उसका सही स्थान संसद है, न कि केवल राजनीतिक प्रदर्शन।

संसद में चर्चा के लिए सरकार तैयार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार NEET से जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाएगा और यदि किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो उसका समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

प्रधान ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

NEET विवाद क्यों बना चर्चा का विषय?

हाल के दिनों में NEET परीक्षा को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता और छात्रों की शिकायतों को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार से जवाब मांगा है। इसी मुद्दे को लेकर कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को समय पर संबोधित करने में विफल रही है। वहीं सरकार का कहना है कि वह सभी शिकायतों की समीक्षा कर रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी।

राजनीति बनाम छात्रों का भविष्य

NEET विवाद अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन चुका है। एक ओर विपक्ष सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, वहीं सरकार का आरोप है कि छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर सभी पक्षों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर छात्रों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

आगे क्या?

अब सभी की निगाहें संसद के मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां NEET से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि सरकार और विपक्ष दोनों इस विषय पर सार्थक संवाद करेंगे और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे जिससे भविष्य में किसी भी छात्र को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

फिलहाल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान ने NEET विवाद को लेकर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में संसद में होने वाली चर्चा और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि छात्रों की चिंताओं का समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।