प्रशासनिक समन्वय की कमी से बकाया भुगतान के इंतजार में आलू किसान, ADA कार्यालय ने मार्केटिंग विभाग को भेजने का दिया आश्वासन

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प्रशासनिक समन्वय की कमी से भुगतान का इंतजार कर रहे आलू किसान, ADA कार्यालय में सौंपा ज्ञापन

प्रशासनिक समन्वय की कमी से अनिश्चितता में आलू किसान, ADA कार्यालय में बकाया भुगतान को लेकर उठाई आवाज

पश्चिम बंगाल के कई आलू किसान लंबे समय से अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर आज प्रभावित किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल ADA (Assistant Director of Agriculture) कार्यालय पहुंचा और अपनी शिकायत दर्ज कराई। किसानों का आरोप है कि उन्होंने सरकार की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए समय पर कोल्ड स्टोरेज में आलू जमा किया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें उनकी मेहनत का भुगतान नहीं मिला।

ADA कार्यालय में किसानों की शिकायत सुनने के लिए संबंधित अधिकारियों को बुलाया गया। किसानों ने विस्तार से अपनी समस्या रखी और बताया कि भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण वे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। खेती के लिए लिया गया कर्ज, बीज, उर्वरक और अन्य कृषि खर्चों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकारी भुगतान नहीं मिलने से उनकी स्थिति और भी कठिन हो गई है।

ADA अधिकारी ने मांगा लिखित आवेदन

किसानों की पूरी बात सुनने के बाद ADA अधिकारी ने कहा कि अभी तक उनके कार्यालय को किसानों की ओर से कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि वे एक औपचारिक लिखित आवेदन जमा करें ताकि सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूरे मामले को मार्केटिंग विभाग के पास भेजा जा सके।

ADA अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके विभाग की ओर से जो भी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जानी थी, वह पूरी कर दी गई है। अब आगे की कार्रवाई और भुगतान जारी करने की जिम्मेदारी मार्केटिंग विभाग की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद वे स्वयं सभी दस्तावेजों को संलग्न कर संबंधित विभाग को भेज देंगे।

मार्केटिंग विभाग तक मामला पहुंचाने का आश्वासन

बैठक के दौरान ADA अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि किसान स्वयं मार्केटिंग विभाग के कार्यालय नहीं जाना चाहते हैं, तो वे अपनी ओर से पूरा मामला आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने किसानों से बाद में भी संपर्क बनाए रखने को कहा और आश्वासन दिया कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक सहायता की आवश्यकता होने पर उनका कार्यालय सहयोग करेगा।

अधिकारी के अनुसार, आवेदन और दस्तावेज मार्केटिंग विभाग को भेजे जाने के बाद भुगतान जारी करने का निर्णय उसी विभाग के स्तर पर लिया जाएगा।

आश्वासन के बावजूद किसानों में निराशा

हालांकि अधिकारियों की ओर से सहयोग और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसानों के चेहरे पर राहत दिखाई नहीं दी। उनका कहना है कि पिछले कई महीनों से उन्हें लगातार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन आज तक किसी विभाग ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि भुगतान कब मिलेगा।

किसानों का आरोप है कि हर कार्यालय अपनी जिम्मेदारी किसी दूसरे विभाग पर डाल देता है। कभी कोल्ड स्टोरेज प्रशासन किसी अन्य विभाग का नाम लेता है, तो कभी BDO कार्यालय दूसरी जानकारी देता है। ADA कार्यालय का कहना है कि मामला मार्केटिंग विभाग के पास है, जबकि किसानों को अन्य स्तरों पर अलग-अलग जवाब मिल रहे हैं।

विभागों के बीच समन्वय की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या

इस पूरे घटनाक्रम से किसानों का मानना है कि मुख्य समस्या विभागों के बीच समन्वय की कमी है। यदि संबंधित विभाग समय पर एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा करते और स्पष्ट जिम्मेदारी तय होती, तो किसानों को महीनों तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ता।

किसानों का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण उन्हें बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है। कई किसानों ने बताया कि वे खेती के साथ-साथ रोजमर्रा के घरेलू खर्च भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं।

बकाया भुगतान जल्द जारी करने की मांग

प्रभावित किसानों ने मांग की है कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द बकाया राशि जारी करे। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक सहायता का मामला नहीं है, बल्कि उनकी मेहनत और अधिकार से जुड़ा विषय है।

किसानों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि विभागों के बीच जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी किसान को इसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य किसानों की सहायता करना है, लेकिन यदि भुगतान समय पर नहीं मिलता तो योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता।

अब मार्केटिंग विभाग की कार्रवाई पर टिकी उम्मीद

फिलहाल किसानों ने लिखित आवेदन देने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। ADA कार्यालय ने आवेदन प्राप्त होने के बाद उसे सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ मार्केटिंग विभाग को भेजने का आश्वासन दिया है। अब किसानों की निगाहें मार्केटिंग विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

जब तक भुगतान जारी नहीं होता, तब तक इन किसानों की आर्थिक चिंता बनी रहेगी। किसानों का कहना है कि उन्हें किसी आश्वासन से अधिक आवश्यकता अपने मेहनत के उचित और समय पर मिलने वाले भुगतान की है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय स्थापित कर संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी कर पाते हैं।