चुनाव ड्यूटी में लगे बस ड्राइवर-कंडक्टर क्या इस बार नहीं दे पाएंगे वोट? जानिए पूरी खबर

1000192828

चुनाव ड्यूटी में लगे बस चालक-परिचालकों का वोट अधिकार: क्या इस बार भी छूट जाएगा मतदान?

1000192828

हर चुनाव के समय एक बड़ा सवाल बार-बार उठता है—क्या चुनाव प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने वाले सभी लोग खुद अपने मताधिकार का उपयोग कर पाते हैं? खासकर बस चालक (ड्राइवर) और परिचालक (कंडक्टर), जो पुलिस और अर्धसैनिक बलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं, अक्सर इस अधिकार से वंचित रह जाते हैं। इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं दिख रही है।

सूत्रों के अनुसार, चुनावी ड्यूटी के लिए लगभग 90% बसों को अधिग्रहित कर लिया गया है। इन बसों के चालक और परिचालक लगातार कई दिनों तक ड्यूटी पर रहते हैं। वे सुबह से रात तक अलग-अलग क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को पहुंचाने का काम करते हैं, जिससे वे अपने मतदान केंद्र तक पहुंच ही नहीं पाते।

मतदान से वंचित रहने की समस्या

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को मतदान का अधिकार दिया गया है। लेकिन जब वही नागरिक, जो चुनाव की व्यवस्था को सफल बनाते हैं, खुद मतदान नहीं कर पाते, तो यह एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। बस चालकों और परिचालकों का कहना है कि वे चुनाव के दौरान इतनी व्यस्तता में रहते हैं कि उनके लिए अपने क्षेत्र में जाकर वोट देना लगभग असंभव हो जाता है।

कई चालक बताते हैं कि उन्हें लगातार अलग-अलग जिलों में भेजा जाता है। कई बार वे अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर होते हैं। ऐसे में उनके पास न समय होता है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था, जिससे वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

चुनाव आयोग से मांग

इस बार बस चालक और परिचालक खुलकर अपनी मांग सामने रख रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे चुनाव ड्यूटी में लगे सरकारी कर्मचारियों के लिए पोस्टल बैलेट या विशेष मतदान की व्यवस्था होती है, वैसे ही उनके लिए भी कोई व्यवस्था की जानी चाहिए।

उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • ड्यूटी पर तैनात ड्राइवर और कंडक्टर के लिए पोस्टल बैलेट की सुविधा
  • विशेष मतदान केंद्र की व्यवस्था
  • ड्यूटी के बीच में मतदान के लिए समय और अनुमति

उनका मानना है कि जब वे लोकतंत्र की प्रक्रिया को सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं, तो उन्हें भी इस प्रक्रिया में भाग लेने का समान अवसर मिलना चाहिए।

क्या है वर्तमान व्यवस्था?

वर्तमान में चुनाव ड्यूटी में लगे कई सरकारी कर्मचारियों को पोस्टल बैलेट या ई-डाक मतदान (ETPBS) जैसी सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन बस चालक और परिचालक, जो अक्सर निजी या राज्य परिवहन से जुड़े होते हैं, इस सुविधा के दायरे में नहीं आते। यही कारण है कि हर चुनाव में हजारों लोग अपने वोट के अधिकार से वंचित रह जाते हैं।

विशेषज्ञों की राय

चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन इसे अब गंभीरता से लेने की जरूरत है। उनका मानना है कि चुनाव आयोग को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

कुछ विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि तकनीक का उपयोग करके मोबाइल वोटिंग यूनिट या अस्थायी मतदान केंद्र बनाए जा सकते हैं, जहां ड्यूटी पर तैनात लोग आसानी से मतदान कर सकें।

लोकतंत्र के लिए जरूरी है समाधान

लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि कितने लोग मतदान प्रक्रिया में भाग लेते हैं। अगर बड़ी संख्या में लोग, खासकर वे जो चुनाव को सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं, वोट नहीं दे पा रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है।

बस चालक और परिचालकों की यह मांग पूरी तरह जायज लगती है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और क्या आने वाले समय में इन लोगों को भी उनके अधिकार का पूरा लाभ मिल पाता है या नहीं।

फिलहाल, इन कर्मियों की उम्मीद यही है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें भी लोकतंत्र के इस सबसे बड़े त्योहार में भाग लेने का मौका मिलेगा।