टोरंटो, ओंटारियो – कनाडा के प्रधानमंत्री ने हाल ही में यहूदी समुदाय के खिलाफ बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। पीएम ने कहा कि पूरे देश में यहूदियों के प्रति वैमनस्य और घृणा की घटनाएं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के स्तर तक पहुंच गई हैं, जो कि बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री कार्नी ने अपने एक बयान में कहा, “मुझे खेद है कि कनाडा में यहूदी समुदाय सुरक्षा की दृष्टि से असुरक्षित महसूस कर रहा है। antisemitism की घटनाएं इतनी बढ़ गई हैं कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
विश्लेषकों का कहना है कि हाल के वर्षों में समाज में भय और असहिष्णुता के कारण यहूदी समुदाय पर हमले बढ़े हैं। इनमें न केवल शारीरिक हमले हैं, बल्कि ऑनलाइन घृणा फैलाने वाली कार्रवाइयां भी शामिल हैं। यह स्थिति कनाडा की विविधता और समावेशिता के लिए बड़े खतरे का संकेत है।
कनाडा की यहूदी संघटनाओं ने भी इस मामले में प्रशासन को चेतावनी दी है कि वे समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ अपनाएं। संघटनाओं के प्रतिनिधि बताते हैं कि antisemitism केवल यहूदियों को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की समरसता को प्रभावित करता है।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस समस्या का सामना करें और घृणा फैलाने वाले तत्वों को बेनकाब करें। उन्होंने जो संदेश दिया, वह कनाडा की बहुलतावादी संस्कृति को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि antisemitism जैसे सामाजिक कुप्रवृत्तियों को समाप्त करने के लिए केवल क़ानूनी कदम पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और शिक्षा भी आवश्यक है। इस चुनौती का सामना करने के लिए व्यापक सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री कार्नी का यह बयान कनाडा में चल रहे बहस को नई दिशा देगा और उम्मीद की जा रही है कि इससे यहूदी समुदाय के प्रति बढ़ती असुरक्षा को कम किया जा सकेगा। यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि नफरत और हिंसा के खिलाफ सभी को मिलकर काम करना होगा।
