दामोदर नदी फेरी घाट का किराया 2 से 5 रुपये करने की मांग, जमालपुर विधायक अरुण हलदर को सौंपा गया आवेदन

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दामोदर नदी फेरी घाट का किराया बढ़ाने की मांग, जमालपुर विधायक अरुण हलदर को सौंपा गया आवेदन

दामोदर नदी फेरी घाट का किराया बढ़ाने की मांग, जमालपुर विधायक अरुण हलदर को सौंपा गया आवेदन

जमालपुर, पूर्व बर्धमान: दामोदर नदी पर संचालित फेरी सेवा से जुड़े संचालकों ने मौजूदा किराए को लेकर गंभीर आर्थिक संकट की बात सामने रखी है। वर्तमान में यात्रियों से नदी पार कराने के लिए प्रति व्यक्ति केवल 2 रुपये का किराया लिया जाता है। फेरी घाट संचालकों का कहना है कि इतने कम किराए में नाव संचालन, रखरखाव, कर्मचारियों के भुगतान, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक खर्चों का वहन करना अब संभव नहीं रह गया है।

इसी समस्या को लेकर फेरी घाट प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने आज जमालपुर में विधायक अरुण हलदर के जनता कार्यालय पहुंचकर एक आवेदन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक से अनुरोध किया कि प्रशासन के समक्ष इस विषय को उठाकर न्यूनतम किराया 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये प्रति यात्री करने की पहल की जाए, ताकि फेरी सेवा को बिना किसी बाधा के जारी रखा जा सके।

संचालकों ने बताई आर्थिक कठिनाई

फेरी घाट संचालकों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से यात्रियों से 2 रुपये का ही किराया लिया जा रहा है। इस दौरान नावों के रखरखाव का खर्च, ईंधन, मजदूरी, मरम्मत, सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था और अन्य परिचालन लागत में लगातार वृद्धि हुई है। लेकिन किराए में कोई बदलाव नहीं होने के कारण घाट संचालन में लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में इस सेवा को जारी रखना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। यदि समय रहते किराए में संशोधन नहीं किया गया तो भविष्य में सेवा प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

प्रतिदिन 400 से 500 लोग करते हैं फेरी सेवा का उपयोग

घाट प्रबंधन के अनुसार प्रतिदिन लगभग 400 से 500 यात्री इस फेरी सेवा का उपयोग करते हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह सेवा केवल नदी पार करने का माध्यम नहीं बल्कि रोजमर्रा के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई लोग काम पर जाने, छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज पहुंचने तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बाजार और विभिन्न सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने के लिए इसी फेरी सेवा पर निर्भर रहते हैं।

संचालकों का कहना है कि यदि किराया 5 रुपये किया जाता है तो इससे यात्रियों पर बहुत अधिक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, लेकिन घाट संचालन को स्थिर बनाए रखने में काफी सहायता मिलेगी। इससे यात्रियों को नियमित और सुरक्षित सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

विधायक अरुण हलदर से की गई मांग

फेरी घाट के प्रतिनिधियों ने विधायक अरुण हलदर से मुलाकात के दौरान विस्तार से अपनी समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान किराए में घाट संचालन करना घाट प्रबंधन के लिए लगातार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर किराया पुनर्निर्धारित करने की आवश्यकता है।

प्रतिनिधियों ने विधायक से अनुरोध किया कि वे संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से इस विषय पर चर्चा कर उचित समाधान निकालने में सहयोग करें। उनका कहना था कि यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो फेरी सेवा पहले की तरह सुचारु रूप से चलती रहेगी और यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

विधायक ने दिया सकारात्मक आश्वासन

फेरी घाट प्रतिनिधियों के अनुसार विधायक अरुण हलदर ने उनकी पूरी बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि इस विषय पर वे विस्तार से विचार करेंगे और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।

विधायक ने यह भी संकेत दिया कि जनहित और फेरी सेवा की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए जो भी उचित एवं व्यवहारिक समाधान संभव होगा, उसके लिए प्रयास किए जाएंगे।

संचालकों में जगी उम्मीद

विधायक से मुलाकात के बाद फेरी घाट संचालकों ने उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं का समाधान निकलेगा। उनका कहना है कि यदि किराया बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो घाट संचालन आर्थिक रूप से अधिक संतुलित होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किराया बढ़ाना नहीं है, बल्कि फेरी सेवा को लंबे समय तक सुरक्षित, नियमित और व्यवस्थित रूप से जारी रखना है। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में न्यूनतम किराया संशोधित किया जाना आवश्यक हो गया है।

स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है फेरी सेवा

दामोदर नदी पर संचालित यह फेरी सेवा क्षेत्र के अनेक ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। सड़क मार्ग की तुलना में यह सेवा समय और दूरी दोनों की बचत करती है। ऐसे में यदि सेवा किसी कारणवश प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर स्थानीय नागरिकों की दैनिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

इसी कारण फेरी घाट संचालकों का कहना है कि प्रशासन को यात्रियों की सुविधा और घाट संचालन की आर्थिक वास्तविकताओं, दोनों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लेना चाहिए। उनका विश्वास है कि विधायक के हस्तक्षेप से इस मामले में सकारात्मक पहल होगी और जल्द ही कोई व्यवहारिक समाधान सामने आएगा।

फिलहाल सभी की नजर प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी हुई है। यदि किराया संशोधन को मंजूरी मिलती है, तो इससे दामोदर नदी की फेरी सेवा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।