Bengaluru, Karnataka
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को दस दिन में चौथी बार वृद्धि की गई है। इस बार ईंधन की कीमतें लगभग ₹2.7 से ₹2.8 प्रति लीटर तक बढ़ी हैं, जो सभी वैरिएंट्स में समान रूप से लागू हुई हैं। इस वृद्धि के कारण कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (कर्नाटक आरटीसी) पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ गया है। पिछले दस दिनों में ईंधन की लगातार मूल्य वृद्धि के चलते कर्नाटक आरटीसी पर ₹40 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त खर्च आ गया है, जिससे उसके संचालन पर गहरा असर पड़ा है।
कर्नाटक आरटीसी का कहना है कि ईंधन की कीमतों में इतनी तेजी से गिरावट नहीं हुई है, जिससे उन्हें अपनी बसों के उपभोग की लागत वहन करने में परेशानी हो रही है। यात्रियों से किराए में वृद्धि की मांग भी कई बार उठ चुकी है, लेकिन जनहित की दृष्टि से किराया वृद्धि पर नियंत्रण रखा जा रहा है। प्रशासन अब ईंधन की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए अगले कदमों पर विचार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता के कारण घरेलू ईंधन की कीमतों में यह उछाल आया है। इससे न केवल परिवहन निगमों को आर्थिक कठिनाई हो रही है, बल्कि लोगों की दैनिक यात्रा महंगी होती जा रही है।
अधिकारी यह भी बताते हैं कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण आरटीसी को अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रबंधन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों की संख्या में भी कमी आने का खतरा है, जिससे निगम की आमदनी प्रभावित हो सकती है।
सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह जल्द ही ईंधन पर लगने वाले करों में कमी करके, या आरटीसी को आर्थिक सहायता प्रदान करके इस स्थिति को संभालने का प्रयास करेगी। फिलहाल यात्रियों को इतनी बार कीमत वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके रोजमर्रा के खर्च बढ़ गए हैं।
यह लगातार बढ़ती कीमतें देश में ईंधन की बढ़ती मांग तथा अंतरराष्ट्रीय संकट की ओर भी संकेत करती हैं। विशेषज्ञों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह संतुलित नीतियां अपनाए ताकि सामान्य उपभोक्ताओं और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर इससे पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोका जा सके।
