भोपाल, मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोजशाला आंदोलन के दौरान प्राण बंद करने वाले लोगों के परिवारों को वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने भोजशाला के इतिहास को संजोते हुए ‘सरस्वती लोक’ कॉरिडोर के निर्माण और राजा भोज के नाम पर एक शोध केंद्र स्थापित करने की योजना भी सार्वजनिक की।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भोजशाला विवाद का जो भी फैसला आया है, वह 750 वर्षों की लंबी संघर्ष यात्रा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक मुद्दा नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का मामला है।
जानकारी के अनुसार, भोजशाला आंदोलन के दौरान कई नागरिकों ने अपने जीवन की आहुति दी थी। सरकार ने उनकी शहादत को सम्मानित करते हुए मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है। यह कदम निश्चित रूप से आंदोलन में जीवन गंवाने वालों के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और उनके परिवारों को राहत प्रदान करेगा।
सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘सरस्वती लोक’ कॉरिडोर का उद्देश्य सरस्वती नदी के प्राचीन महत्व और उसकी सांस्कृतिक महत्ता को उजागर करना है। यह कॉरिडोर लोगों को सरस्वती नदी और उससे जुड़ी सभ्यता के बारे में जागरूक करेगा और पर्यटन के विकास में भी सहायक सिद्ध होगा। वहीं, राजा भोज के नाम पर स्थापित होने वाला शोध केंद्र मध्यकालीन भारत के इतिहास, संस्कृति और कला पर व्यापक अध्ययन करेगा। इससे शोधकर्ताओं को नई जानकारियाँ जुटाने और शिक्षाविद् इलाके के इतिहास को बेहतर समझने में मदद मिलेगी।
प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन के लिए यह कदम एक अहम पहल है। मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार आने वाले समय में ऐसी और योजनाएं बनाएगी जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण हो सके। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं।
