
महिला आरक्षण विधेयक पास न होने पर प्रधानमंत्री ने मांगी माफी, विपक्ष पर साधा निशाना
नई दिल्ली: शनिवार शाम राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने को लेकर देश की महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा देशहित में थी, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे सफल नहीं होने दिया। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उनकी स्वार्थपरक राजनीति के कारण देश की महिलाओं को इसका नुकसान उठाना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि वे विशेष रूप से देश की माताओं, बहनों और महिलाओं से संवाद करने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि किस तरह महिलाओं के विकास को रोका गया और उनके सपनों को कुचल दिया गया।
“देशहित सर्वोपरि था, लेकिन राजनीति आड़े आई”
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने वर्षों तक प्रयास किया, लेकिन हम सफल नहीं हो सके। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया। इसके लिए मैं देश की माताओं और बहनों से क्षमा चाहता हूं। हमारे लिए देशहित सबसे पहले है, लेकिन कुछ लोगों के लिए दलहित ही सब कुछ बन जाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब राजनीति देशहित पर भारी पड़ती है, तो इसका खामियाजा समाज के कमजोर वर्गों को भुगतना पड़ता है और इस बार महिलाएं इसका शिकार बनी हैं।
विपक्षी दलों पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इन दलों की राजनीति के कारण महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं हो पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब संसद में विधेयक गिरा, तब इन दलों के नेताओं ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की।
प्रधानमंत्री ने कहा, “यह सिर्फ टेबल थपथपाना नहीं था, बल्कि देश की महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना था। यह दृश्य देश की करोड़ों महिलाओं ने देखा और यह उनकी स्मृति में हमेशा रहेगा।”
महिलाओं को बताया जागरूक
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की महिलाएं जागरूक हैं और देश में होने वाली हर घटना पर नजर रखती हैं। “जो लोग इस विधेयक के विरोध में खड़े हुए हैं, उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा,” उन्होंने चेतावनी दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं अब सच्चाई जान चुकी हैं और वे सही समय पर अपना निर्णय लेंगी।
वोटिंग के आंकड़े और राजनीतिक असर
शुक्रवार को संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ, जिसमें इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 वोट विरोध में आए। हालांकि, आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।
इस परिणाम के बाद सरकार की वह योजना भी प्रभावित हुई, जिसमें डिलिमिटेशन (सीमांकन) के जरिए विभिन्न राज्यों में सीटों का पुनर्वितरण किया जाना था।
डिलिमिटेशन को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे डिलिमिटेशन को लेकर जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया से किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होगा और न ही किसी की प्रतिनिधित्व क्षमता कम होगी।
उन्होंने कहा, “हमारी योजना थी कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ें। इससे तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल समेत सभी राज्यों को फायदा होता। लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से इसे रोक दिया।”
कांग्रेस पर ऐतिहासिक विरोध का आरोप
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने हमेशा सुधारात्मक नीतियों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी कई महत्वपूर्ण फैसलों जैसे जीएसटी, तीन तलाक, अनुच्छेद 370 और यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस विधेयक के जरिए देश में विभाजन की राजनीति करने की कोशिश की और झूठ फैलाया कि कुछ राज्यों का नुकसान होगा।
“यह महिलाओं के खिलाफ अपराध”
प्रधानमंत्री ने विपक्ष के रवैये को महिलाओं के खिलाफ अपराध करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों का हनन है। उन्होंने इसे “भ्रूण हत्या” जैसी संज्ञा देते हुए कहा कि देश के सामने एक बड़े अवसर को खत्म कर दिया गया।
भविष्य में महिलाओं की भूमिका पर जोर
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की महिलाएं इस घटना को नहीं भूलेंगी और भविष्य में इसका राजनीतिक असर जरूर दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाएं देश के विकास में अपनी भूमिका को और मजबूत करेंगी और सही निर्णय लेंगी।
उन्होंने कहा, “देश की महिलाएं अब चुप नहीं रहेंगी। वे अपने अधिकारों के लिए खड़ी होंगी और जो उनके रास्ते में आएगा, उसे जवाब देंगी।”
