नई दिल्ली, भारत
दुनियाभर में बच्चों में किडनी स्टोन की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पहले यह समस्या मुख्यतः वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन, जो पारंपरिक रूप से वयस्कों में पाए जाते थे, बच्चों में भी प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। इस बदलाव ने विशेषज्ञों और चिकित्सकों के ध्यान को इस बात की ओर मोड़ा है कि बच्चों के जीवनशैली और खानपान में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जिनका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों में किडनी स्टोन होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं गलत आहार, कम पानी पीना, और बढ़ती शारीरिक सक्रियता की कमी। आज की पीढ़ी बच्चे अधिकतर जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और मिठाई का सेवन अधिक कर रहे हैं, जिससे उनके शरीर में कैल्शियम और ऑक्सलेट का असंतुलन पैदा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप किडनी में स्टोन बनने की संभावना बढ़ जाती है।
विदेशी और राष्ट्रीय रिसर्च से पता चला है कि बच्चों में किडनी स्टोन की घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में दोगुनी हो गई हैं। खासकर नगर क्षेत्रों में, जहां बच्चों का जीवनशैली अधिक सेडेंटरी हो गया है, वहां यह समस्या खासतौर से बढ़ी है। विशेषज्ञ इस पर चिंता जता रहे हैं क्योंकि किडनी स्टोन का समय पर उपचार न होने पर यह मोटे नुकसान पहुंचा सकता है, तथा बच्चों के सामान्य विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
डॉक्टर रिया साहनी बताती हैं, “हमें बच्चों के खानपान और उनके जीवनशैली में सुधार लाना होगा। बच्चों को अधिक फल, हरी सब्जियां तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के प्रति जागरूक करना अहम है। साथ ही शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना भी जरूरी है।” इसके अलावा, स्कूल स्तर पर पोषण शिक्षा और नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, खासकर तब जब बच्चे बार-बार पेट दर्द, यूरिन संबंधी कोई शिकायत या कमजोरी महसूस करें। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि वे किडनी स्टोन की शुरुवात हो सकती है।
इस समस्या को रोकने के लिए सामाजिक संस्थाओं एवं स्वास्थ्य विभागों को भी जागरूक अभियान चलाने की जरूरत है ताकि बच्चों के बीच स्वस्थ आदतें पनप सकें। आखिरकार, स्वस्थ जीवनशैली ही किडनी स्टोन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
