
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पहले चरण में 89.93% मतदान, दक्षिण दिनाजपुर सबसे आगे
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान देखने को मिला है। चुनाव आयोग के अनुसार, शाम 5 बजे तक कुल 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा राज्य में लोकतांत्रिक भागीदारी की मजबूत तस्वीर पेश करता है।
इस चरण में कुल 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जहां ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक मतदाताओं में भारी उत्साह देखने को मिला। खासकर महिलाओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
जिलावार मतदान प्रतिशत (शाम 5 बजे तक)
- दक्षिण दिनाजपुर: 93.12%
- उत्तर दिनाजपुर: 91.45%
- मालदा: 90.87%
- मुर्शिदाबाद: 92.10%
- बीरभूम: 89.76%
- पश्चिम बर्दवान: 85.32%
- पूर्व बर्दवान: 88.94%
- नदिया: 90.21%
- उत्तर 24 परगना: 87.65%
- दक्षिण 24 परगना: 88.73%
- हावड़ा: 86.40%
- हुगली: 89.05%
- बांकुड़ा: 91.02%
- पुरुलिया: 90.56%
- पश्चिम मेदिनीपुर: 89.88%
- पूर्व मेदिनीपुर: 88.67%
- जलपाईगुड़ी: 90.11%
- अलीपुरद्वार: 89.54%
- कूचबिहार: 91.20%
- दार्जिलिंग: 78.45%
- कालिम्पोंग: 76.90%
- कोलकाता: 72.30%
कहां सबसे ज्यादा और सबसे कम मतदान हुआ?
इस चरण में दक्षिण दिनाजपुर ने 93.12% मतदान के साथ सबसे आगे रहा। इसके अलावा मुर्शिदाबाद, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में भी 90% से अधिक मतदान दर्ज किया गया।
वहीं, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम मतदान देखा गया। कोलकाता में सबसे कम 72.30% मतदान हुआ, जबकि दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भी मतदान प्रतिशत कम रहा।
मतदाताओं में उत्साह, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राज्य के विभिन्न हिस्सों में लंबी कतारों में खड़े होकर लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की थी। कई संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की विशेष निगरानी रही।
कुछ स्थानों से छिटपुट झड़पों और तकनीकी समस्याओं की खबरें जरूर आईं, लेकिन कुल मिलाकर मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही।
महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी
इस बार के चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। कई बूथों पर महिलाओं की लाइन पुरुषों से लंबी देखी गई। इसके साथ ही पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
आगे क्या?
पहले चरण के मतदान के बाद अब सभी की नजरें अगले चरणों पर टिकी हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह आंकड़े बेहद अहम हैं, क्योंकि इससे चुनावी रुझान का संकेत मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मतदान प्रतिशत बदलाव का संकेत हो सकता है, हालांकि अंतिम नतीजे आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
