झाड़ग्राम में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज़, सड़क किनारे खाया झालमुड़ी

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झाड़ग्राम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अलग ही अंदाज़ देखने को मिला।
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झाड़ग्राम में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज़, सड़क किनारे खाया झालमुड़ी

झाड़ग्राम में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज़, सड़क किनारे खाया झालमुड़ी

जनसभा के बाद अचानक रुका काफिला, आम लोगों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री

पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में रविवार को एक अनोखा और दिलचस्प नज़ारा देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला अचानक बीच रास्ते में रुक गया। यह कोई सुरक्षा कारण या तकनीकी समस्या नहीं थी, बल्कि एक खास वजह से प्रधानमंत्री खुद गाड़ी से उतर गए।

दरअसल, सभा समाप्त होने के बाद जब प्रधानमंत्री हेलिपैड की ओर बढ़ रहे थे, तभी उन्होंने सड़क किनारे एक छोटे से झालमुड़ी के ठेले को देखा। अचानक उन्होंने काफिला रुकवाया और धीरे-धीरे उस दुकान की ओर बढ़ गए। वहां मौजूद लोग पहले तो समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है।

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प्रधानमंत्री ने दुकान के मालिक से मुस्कुराते हुए कहा, “भाई, झालमुड़ी खिलाइए।” यह सुनकर दुकानदार विक्रम साव कुछ क्षण के लिए हैरान रह गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि देश के प्रधानमंत्री उनके ठेले पर खड़े होकर झालमुड़ी खाने की बात कर रहे हैं।

विक्रम ने जब झालमुड़ी बनानी शुरू की, तो उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा, “झाल (मसालेदार) खाएंगे?” इस पर प्रधानमंत्री ने हंसते हुए जवाब दिया, “हां, खाता हूं।” फिर दुकानदार ने पूछा, “प्याज डालूं?” प्रधानमंत्री ने कहा, “प्याज भी खाता हूं… सिर्फ दिमाग नहीं खाता।” उनके इस मजाक पर वहां मौजूद लोग भी हंस पड़े।

प्रधानमंत्री ने 10 रुपये की झालमुड़ी खरीदी। दुकानदार पैसे लेने में झिझक रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि “ऐसा नहीं होता,” और खुद अपनी जेब से पैसे निकालकर उसे दिए। इस छोटे से व्यवहार ने लोगों का दिल जीत लिया।

झालमुड़ी तैयार होने के बाद प्रधानमंत्री ने उसे खुद खाया और वहां मौजूद लोगों के साथ भी साझा किया। यह दृश्य वहां खड़े हर व्यक्ति के लिए बेहद खास और यादगार बन गया।

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इस दौरान कई स्थानीय लोग भी वहां मौजूद थे। कणिका महतो और कल्याणी महतो ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे अपनी आंखों के सामने प्रधानमंत्री को इतने सहज अंदाज़ में देख पाएंगे। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री का इतना सरल और मिलनसार व्यवहार हमें बहुत अच्छा लगा।”

दुकानदार विक्रम साव, जो मूल रूप से बिहार के गया के रहने वाले हैं, ने बताया कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार पल था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे उनका नाम, परिवार और गांव के बारे में पूछा और फिर उनसे झालमुड़ी बनाने को कहा।

विक्रम ने कहा, “मैं बहुत घबरा गया था, लेकिन प्रधानमंत्री बहुत ही सरल तरीके से बात कर रहे थे। उन्होंने झालमुड़ी खाई और दूसरों को भी खिलाई। यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।”

प्रधानमंत्री का यह अंदाज़ सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में है। उन्होंने खुद इस पल की तस्वीरें साझा कीं, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। लोग इसे “मूड़ी पे चर्चा” का नाम दे रहे हैं, जो उनके पहले के “चाय पे चर्चा” कार्यक्रम की याद दिलाता है।

राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच इस तरह का मानवीय और सहज व्यवहार लोगों के दिल को छू जाता है। यह घटना यह भी दिखाती है कि बड़े पद पर होने के बावजूद साधारण लोगों के साथ जुड़ाव कितना महत्वपूर्ण होता है।

झाड़ग्राम की यह घटना अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी है। लोग इसे प्रधानमंत्री की सादगी और आम जनता से उनके जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह सिर्फ एक झालमुड़ी खाने की घटना नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसा पल था जिसने राजनीति के औपचारिक माहौल के बीच इंसानियत और सादगी की एक अलग ही तस्वीर पेश की।