नई दिल्ली, भारत – चुनाव आयोग ने राज्यसभा के 27 सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी है, जिसमें 10 राज्यों में 24 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव और महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा में तीन रिक्त सीटों पर उपचुनाव शामिल हैं। इसके साथ ही बिहार और कर्नाटक विधान परिषद के भी चुनाव आयोजित किए जाएंगे।
राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया 1 जून 2026 को सुबह 11 बजे शुरू हुई और उम्मीदवार 8 जून तक अपने नामांकन दाखिल कर सकते हैं। नामापत्रों की जांच 9 जून को संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा की जाएगी और 11 जून नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख होगी। यदि चुनाव स्तरीय होंगे तो 18 जून को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा, जबकि उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना शुरू कर दी जाएगी।
राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता है, बल्कि संबंधित राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। इसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली द्वारा अनुपातहीन प्रतिनिधित्व के तहत कराया जाता है। इस प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक पार्टी को उसकी विधानसभा में मजबूती के अनुपात में राज्यसभा सीटें मिलती हैं।
राज्यसभा सदस्य कैसे चुने जाते हैं?
राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन एक अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया है। प्रत्येक राज्य और संघ शासित प्रदेश के निर्वाचित विधानसभा सदस्य अपनी-अपनी सदन की संख्या के अनुसार वोट करते हैं। सत्ता में मौजूद और विपक्षी दल अपने-अपने उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारते हैं। मतदान के दौरान विधानसभा सदस्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में वोट देते हैं।
चुनाव प्रक्रिया का विवरण
चुनाव आयोग के अनुसार, प्रत्येक सीट के लिए एक विशेष न्यूनतम वोट या कोटा निर्धारित किया जाता है, जिसे प्राप्त करने वाला उम्मीदवार निर्वाचित होता है। कोटा की गणना कुल मान्य मतों को (आवश्यक सीटों + 1) से भाग देकर और 1 जोड़कर की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी राज्य सभा चुनाव में 4 सीटें हैं और कुल 140 मतदान होते हैं, तो एक उम्मीदवार के लिए कोटा 36 वोट होगा।
इस प्रणाली के कारण छोटे दल भी गठबंधन के माध्यम से मतदान में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। बड़ी पार्टियाँ अपने उम्मीदवारों को इस कोटा तक पहुंचाने के लिए रणनीतिक मतदान करती हैं। इस प्रकार, राज्यसभा सदन में राजनीतिक दलों की सापेक्ष ताकत विधानसभा के समीकरणों को प्रतिबिंबित करती है।
मतदान कैसे होता है?
मतदान में विधानसभा के सदस्य अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को क्रम से वोट देते हैं, जिसे प्राथमिकता आधारित मतदान कहा जाता है। यदि किसी उम्मीदवार को आवश्यक कोटा से अधिक मत प्राप्त हो जाते हैं, तो वह जीत जाता है। यदि कोई उम्मीदवार कोटा नहीं प्राप्त करता, तो सबसे कम मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार के मत दूसरे विकल्पों को स्थानांतरित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक सभी सीटें भर नहीं जातीं।
राज्यसभा चुनावों का यह तंत्र सुनिश्चित करता है कि विधानसभा में दलों की ताकत के अनुसार राज्यसभा में भी प्रतिनिधित्व हो। इस प्रक्रिया से राज्यसभा की स्थिरता और विविधता बनी रहती है।
इस बार के चुनाव में महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा में उपचुनाव भी शामिल हैं, जिनसे इन राज्यों के प्रतिनिधित्व को पुनः सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही बिहार और कर्नाटक विधान परिषद के उपचुनाव भी होंगे, जिनका परिणाम विधानमंडलों की राजनीतिक स्थिरता पर प्रभाव डालेगा।
चुनाव आयोग द्वारा घोषित समय सारणी के अनुसार सभी चुनाव शांति और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे, जिससे लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण अंग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहेगी।
