Kochi, Kerala
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के राज्य सचिव पी.एस. संजीव ने मंगलवार को कहा कि मलयालम विश्वविद्यालय के कैंपस राजनीति पर गवर्नर द्वारा जारी प्रतिबंध आदेश के खिलाफ एसएफआई के विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय सिंडिकेट ने यह आदेश वापस ले लिया है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय मंडल ने छात्र राजनीति पर लगाये गए प्रतिबंध को हटाते हुए छात्राओं और छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पी.एस. संजीव ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि वे स्पष्ट कर दें कि विश्वविद्यालय में राजनीतिक गतिविधियों पर उनकी क्या स्थिति है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
एसएफआई का कहना है कि छात्र राजनीति किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लोकतांत्रिक जीवन का अहम हिस्सा होती है और इसे प्रतिबंधित करना छात्र समुदाय के अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गतिविधियां विद्यार्थियों को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर जागरूक बनाती हैं और उनकी नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देती हैं।
पिछले दिनों गवर्नर के आदेश के विरोध में विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए, जिससे प्रशासनिक स्तर पर प्रतिक्रिया आई और अंततः आदेश वापस लिया गया। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय का माहौल शांत हुआ है लेकिन छात्र संगठन मुख्यमंत्री और मंत्री से स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग कर रहे हैं।
अस्पष्ट स्थिति के कारण छात्रों में असंतोष की स्थिति बनी हुई थी। पी.एस. संजीव ने कहा कि प्रशासन और राज्य सरकार को छात्रों के हितों पर ध्यान देना चाहिए तथा उन्हें अपनी आवाज उठाने का मौलिक अधिकार देना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार छात्र राजनीति को सहयोग देने में सकारात्मक भूमिका निभाएंगी।
यह मामला राज्य में शिक्षा और छात्रों की राजनीतिक स्वतंत्रता पर गरमागरम बहस का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में छात्र संगठनों को प्रतिबंधित करने से छात्रों की व्यक्तिगत और सामाजिक विकास की राह मुश्किल होती है और इससे लोकतंत्र की नींव कमजोर पड़ती है।
एसएफआई आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्यभर में अभियान चलाने का भी ऐलान कर चुका है ताकि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहें और वे बिना किसी बाधा के अपने विचार व्यक्त कर सकें।
