Ilaiyaraaja, the eternal experimenter

इलैयाराजा, शाश्वत प्रयोगकर्ता

चेन्नई, तमिलनाडु – संगीत जगत के महानायक इलैयाराजा का संगीत आज भी अपनी विशिष्टता और प्रयोगशीलता के लिए जाना जाता है। आधी सदी पहले संगीतकार के रूप में पदार्पण करने वाले इलैयाराजा ने भारतीय संगीत की पारंपरिक धुनों को आधुनिक पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के साथ मिलाकर एक नया संगीत जगत प्रस्तुत किया। उनका संगीत न केवल श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करता है, बल्कि विभिन्न संगीत शैलियों के बीच की सीमाओं को भी मिटाता है। इलैयाराजा की रचनाएँ विभिन्न लोक संगीत शैलियों, कर्नाटक संगीत की जटिलताओं और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की संरचना को मिश्रित करती हैं। इससे उनका संगीत ऐसा बनता है, जिसे किसी एक शैली में बांध पाना मुश्किल है। यह…

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Uthara Unnikrishnan reimagines ‘Suprabhatham’ for a new generation

उत्‍थारा उन्निकृष्णन ने नई पीढ़ी के लिए ‘सुप्रभातम्’ को नया रूप दिया

चेन्नई, तमिलनाडु – मशहूर गायक पी. उन्निकृष्णन की पुत्री उत्‍थारा उन्निकृष्णन ने लोकप्रिय भजन ‘सुप्रभातम्’ को नई पीढ़ी के लिए एक नया रूप दिया है। इस प्रयास के पीछे उनकी प्रेरणा का स्रोत मलयालम सुमधुर गायिका एम.एस. सुब्बालाक्ष्मी की प्रसिद्ध प्रस्तुति रही। उत्‍थारा ने अपने संगीतमय परिवार की विरासत को संभालते हुए ‘सुप्रभातम्’ की धुन और भाव को आधुनिक संवेदनाओं के साथ जोड़ने का प्रयास किया है। यह भजन, जो सुबह के शुभारंभ के लिए बेहद लोकप्रिय है, नई आवाज़ और स्टाइल के साथ युवाओं के बीच फिर से लोकप्रिय हो रहा है। एम.एस. सुब्बालाक्ष्मी की प्रस्तुति ने उत्‍थारा के दिल और दिमाग दोनों पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने कहा,…

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