The ancient trick making food waste useful and tasty

प्राचीन विधि जिससे भोजन के अपशिष्ट उपयोगी और स्वादिष्ट बनते हैं

नई दिल्ली, भारत – खाद्य प्रसंस्करण के उपोत्पादों को फेंकने के बजाय, किण्वन (फर्मेंटेशन) की प्रक्रिया के माध्यम से इन्हें मूल्यवान बनाया जा रहा है। यह प्राचीन तकनीक आज भी अपनी प्रभावशीलता और पर्यावरण के प्रति अनुकूलता के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है। किण्वन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्मजीवों की मदद से भोजन के अवशेषों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को नए और पौष्टिक उत्पादों में बदला जाता है। यह न केवल खाद्य सुरक्षा बढ़ाने में मदद करता है बल्कि कचरे की मात्रा को भी काफी कम करता है। आज के समय में, यदि हम खाद्य उपोत्पादों को फेंकने के बजाय उन्हें किण्वित करें तो हम पर्यावरण संरक्षण…

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Training lawyers to see justice as it is lived

वकीलों को न्याय को वैसे ही देखने के लिए प्रशिक्षित करना जैसा कि वह जीवित

नई दिल्ली, दिल्ली देश में न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता और न्याय मिलने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वकीलों को यह सिखाने पर ज़ोर दिया जा रहा है कि वे केवल क़ानूनी दलीलों तक सीमित न रहें, बल्कि न्याय को वास्तविक जीवन के अनुभवों के रूप में देखें। इसका उद्देश्य न्याय को केवल कागज़ों पर सत्यापन नहीं, बल्कि समाज में प्रत्यक्ष रूप से महसूस किए जाने वाले मूल्य के रूप में समझना है। विशेषज्ञों के अनुसार, न्याय केवल विधिक प्रणाली की दक्षता नहीं है, बल्कि यह समाज में लोगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम भी है। इसी संदर्भ…

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Patna Kalam revival: How Bihar is bringing back the lost art that captured everyday India

पटना कलम पुनरुद्धार: कैसे बिहार वापस ला रहा है खोया हुआ कला सूत्र जिसने भारत

पटना, बिहार – बिहार में 18वीं सदी की लगभग भूली हुई कला पटना कलम को पुनर्जीवित करने का प्रयास जोर पकड़ रहा है। यह कला शैलि मुगल मिनिएचर चित्रकला और यूरोपीय प्राकृतिकता के संयोजन से विकसित हुई थी, जिसने तत्कालीन भारत के सामरिक और सामाजिक जीवन की झलक प्रदान की। पटना कलम की पहचान इसकी सूक्ष्मता, रंगों की गहराई और यथार्थवादी चित्रण में निहित होती है। इतिहासकारों और कला विशेषज्ञों का मानना है कि यह कला भारत के रोजमर्रा के जीवन को समृद्ध रूप से संपादित करती है। लेकिन औपनिवेशिक काल और आधुनिकता के दबाव में ये चित्रकला लगभग विलुप्त हो गई थी। हालांकि, अब बिहार सरकार और कई गैर…

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