तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: 84.69% रिकॉर्ड मतदान, एम.के. स्टालिन ने डाला वोट

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: एम.के. स्टालिन ने डाला वोट, 84.69% रिकॉर्ड मतदान


तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: एम.के. स्टालिन ने डाला वोट, रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी हलचल

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के तहत 23 अप्रैल को राज्य की सभी 234 सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री और डीएमके उम्मीदवार एम.के. स्टालिन ने चेन्नई के एक मतदान केंद्र पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया और अपनी उंगली पर लगी स्याही दिखाकर लोकतंत्र के इस पर्व में भागीदारी का संदेश दिया। राज्य में इस बार 84.69% का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत माना जा रहा है।

चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार कुल 5,73,43,291 मतदाता पंजीकृत थे, जो पिछले चुनाव की तुलना में 8.9% कम है। हालांकि मतदाताओं की संख्या में कमी के बावजूद मतदान प्रतिशत में 11.06% की वृद्धि देखी गई, जो राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में से किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 118 सीटों की आवश्यकता होगी। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ डीएमके और विपक्षी एआईएडीएमके के बीच माना जा रहा है।

एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके इस बार भी सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है, जबकि एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में एआईएडीएमके सत्ता में वापसी के लिए जोरदार प्रयास कर रही है।

पिछले चुनाव का प्रदर्शन

2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव एलायंस (SPA) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 234 में से 159 सीटों पर जीत दर्ज की थी। डीएमके ने अकेले 133 सीटें जीती थीं और 37.7% वोट शेयर हासिल किया था। इसके बाद एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

वहीं एआईएडीएमके ने 66 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल का स्थान हासिल किया था। एडप्पादी के. पलानीस्वामी को विपक्ष का नेता चुना गया था। उनका वोट शेयर 33.29% रहा था।

वर्तमान राजनीतिक स्थिति

2026 के चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। एआईएडीएमके में आंतरिक मतभेदों के कारण कई नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया गया। जून 2022 में ओ. पन्नीरसेल्वम, पी.एच. मनोज पांडियन और आर. वैथिलिंगम को पार्टी से बाहर कर दिया गया।

इसके बाद अगस्त 2022 में पी. अय्यप्पन भी निष्कासित गुट में शामिल हो गए। अक्टूबर 2025 में के.ए. सेंगोट्टैयन को पार्टी से निकाला गया और उन्होंने नवंबर 2025 में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया।

राजनीतिक समीकरण उस समय और बदल गए जब मनोज पांडियन और वैथिलिंगम ने क्रमशः नवंबर 2025 और जनवरी 2026 में डीएमके का दामन थाम लिया। फरवरी 2026 में ओ. पन्नीरसेल्वम और अय्यप्पन ने भी विधानसभा से इस्तीफा देकर डीएमके में शामिल हो गए।

पीएमके में भी हुआ विभाजन

2025 के अंत में पट्टाली मक्कल काची (PMK) में भी बड़ा विभाजन देखने को मिला। पार्टी दो गुटों में बंट गई, जिसमें तीन विधायक अनबुमणि रामदास के समर्थन में थे, जबकि दो विधायक एस. रामदास के पक्ष में थे।

बाद में अनबुमणि को आधिकारिक नेता के रूप में मान्यता मिली, जिसके बाद एस. रामदास ने अलग गुट बना लिया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को और जटिल बना दिया।

उपचुनाव और इस्तीफों का असर

2025 में दो विधायकों—टी.के. अमुलकंदासामी (एआईएडीएमके) और के. पोनुसामी (डीएमके)—का निधन हो गया था। इसके अलावा कई नेताओं के इस्तीफों और दल बदल के कारण विधानसभा की संरचना में बदलाव आया।

इन घटनाओं का असर 2026 के चुनाव पर भी देखने को मिल रहा है, जहां गठबंधनों की ताकत और उम्मीदवारों की रणनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

गठबंधन की स्थिति

वर्तमान में डीएमके गठबंधन के पास 158 सीटें हैं, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन के पास 67 सीटें हैं। डीएमके गठबंधन अपनी स्थिति को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन को बहुमत के लिए 51 अतिरिक्त सीटों की जरूरत है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव बेहद प्रतिस्पर्धी हो सकता है, क्योंकि विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और मतदाताओं को लुभाने के लिए कई मुद्दे उठाए हैं।

मतगणना 4 मई को

अब सभी की नजरें 4 मई 2026 पर टिकी हैं, जब मतगणना होगी और चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एम.के. स्टालिन एक बार फिर सत्ता में वापसी करते हैं या एआईएडीएमके कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होती है।

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही गतिशील रही है और इस बार का चुनाव भी कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो सकता है। रिकॉर्ड मतदान ने यह साफ संकेत दिया है कि जनता इस बार बदलाव या स्थिरता—दोनों में से किसी एक को स्पष्ट जनादेश देने के मूड में है।