नई दिल्ली, भारत – अप्रैल महीने में उधार लेने की दर कोविड-19 महामारी के बाद सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले महीने की तुलना में उधार लेने की प्रवृत्ति में वृद्धि मुख्य रूप से बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ता मांग के कारण हुई है।
वहीं, रिटेल बिक्री में गिरावट देखी गई है, जो सीधे तौर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों से जुड़ी हुई है। ईंधन की महंगाई ने उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता को प्रभावित किया है, जिससे छोटी और मध्यम दुकानों में बिक्री कम हुई है।
आर्थिक जानकार बताते हैं कि उधार लेने में वृद्धि का अर्थ यह भी हो सकता है कि उपभोक्ता और व्यवसाय अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक कर्ज पर निर्भर हो रहे हैं। हालांकि, यह स्थिति दीर्घकाल में वित्तीय दबाव बढ़ा सकती है यदि महंगाई और ब्याज दरों में तेजी बनी रहती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में व्यक्तिगत और व्यावसायिक उधार दोनों में वृद्धि हुई है। विशेष रूप से, उपभोक्ता कर्ज में बढ़ोतरी की वजह से बैंकिंग क्षेत्र की सक्रियता भी बढ़ी है। इससे अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ा लेकिन साथ ही कर्ज का जोखिम भी बढ़ा है।
एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने बताया, “उधार लेने की इस बढ़ोतरी से यह स्पष्ट होता है कि लोगों और व्यवसायों को तत्काल नकदी की जरूरत है, जो बढ़ती कीमतों के कारण उत्पन्न हुई आर्थिक चुनौतियों को संभालने के लिए जरूरी हो सकती है।”
दूसरी ओर, रिटेल सेक्टर के विशेषज्ञों ने कहा कि ईंधन की कीमतों में उछाल ने उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को सीधे प्रभावित किया है, जिससे गैर-आवश्यक वस्तुओं की बिक्री कम हो गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ईंधन मूल्य स्थिर रहते हैं तो अगले कुछ महीनों में रिटेल बिक्री में सुधार संभव है।
उद्योग जगत और उपभोक्ता दोनों के लिए यह समय चुनौतियों भरा है। आर्थिक नीतिगत बदलाव और ईंधन की कीमतों में राहत आने पर ही स्थिरता की उम्मीद की जा सकती है। तब तक, उधार लेने की प्रवृत्ति और रिटेल बिक्री के आंकड़ों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
