तेलंगाना में शिशुओं के जीवित रहने की संभावना बेहतर, IMR 17 है राष्ट्रीय औसत 24

Infants in Telangana have better survival odds, IMR at 17 against national average 24

केरल, भारत – देश के बड़े राज्यों में शिशु मृत्यु दर (IMR) के आंकड़ों में केरल ने एक बार फिर सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। केरल में शिशु मृत्यु दर केवल 8 है, जो देश में सबसे कम है और इसे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जन जागरूकता की सफलता माना जा रहा है।

दिल्ली और तमिल नाडु ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, दोनों राज्यों की शिशु मृत्यु दर 11 दर्ज की गई है। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि इन राज्यों में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारों की दिशा में प्रभावी प्रयास जारी हैं।

शिशु मृत्यु दर का मतलब है एक हजार जीवित बच्चों में से कितने बच्चे अपने पहले वर्ष में विगत हो जाते हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि निरंतर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, पोषण और मातृ देखभाल के कारण ही ये आंकड़े इतने सुधरे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, केरल का यह प्रदर्शन उसके व्यापक स्वास्थ्य ढांचे, शिक्षा स्तर में सुधार और उच्च जागरूकता का परिणाम है। राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन मातृ स्वास्थ्य और शिशु देखभाल को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न योजनाएं चला रहे हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है।

भारत सरकार भी सभी राज्यों से इस प्रकार के सुधार के लिए तत्पर रहने की उम्मीद कर रही है ताकि राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके और हर बच्चे को ज़िंदगी का समान अवसर मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अन्य राज्य भी केरल, दिल्ली और तमिल नाडु से सीख लेकर अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर सकते हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि भारत में मातृ-शिशु स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है, जिससे आगामी वर्षों में शिशु मृत्यु दर और नीचे आने की संभावना है।

अन्ततः, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सही पोषण और समय पर चिकित्सा सहायता से बच्चे और माताएं सुरक्षित रह सकती हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास में भी वृद्धि होगी। सरकार और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है कि वे इस दिशा में संयुक्त प्रयास जारी रखें।

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